क्‍या है, इंट्राडे ट्रेडिंग इसके लाभ और हानि, रिटेल इन्वेस्टर्स को इससे दूर रहने को क्‍यों कहा जाता है

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इंट्राडे ट्रेंडिंग और स्टॉक मार्केट इनवेस्टमेंट में बड़ा अंतर है। आमतौर पर इंवेस्टिंग उसे कहते हैं जहां आप अपने पूंजी को लॉन्ग टर्म में लगाते हैं और उस डिपॉजिट्स पर कुछ रिटर्न कमाते हैं। ये निवेश कई सालों तक चलता है लेकिन इंट्राडे ट्रेडिंग में सबकुछ एक दिन में होता है।

भोपाल। इंट्राडे ट्रेडिंग एक ही दिन के भीतर स्टॉक और अन्य वित्तीय उपकरणों की खरीद और बिक्री को कहते हैं। इसे ‘डे ट्रेडिंग’ भी कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, इंट्राडे ट्रेडिंग का मतलब है कि बाजार बंद होने से पहले सभी स्थितियां चुकता हो जाती हैं। इसमें ट्रेडों के रिजल्ट के अनुसार शेयरों के स्वामित्व में कोई बदलाव नहीं होता है। हाल तक इसे वित्तीय फर्मों और पेशेवर व्यापारियों का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और मार्जिन ट्रेडिंग की लोकप्रियता के कारण आज यह बदल गया है। आज, दिन का कारोबार शुरू करना बहुत आसान है। आइये जानते हैं इससे जुड़ी कुछ बातें।

क्या है इंट्राडे ट्रेडिंग

इंट्राडे ट्रेडिंग में एक ही ट्रेडिंग दिन के भीतर वित्तीय उपकरणों को खरीदे और बेचें जाते हैं। ट्रेडर्स का लक्ष्य अल्पकालिक मूल्य में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना और बाजार की अस्थिरता के आधार पर मुनाफा कमाना है।

इसके लिए सावधानीपूर्वक जोखिम प्रबंधन और बाज़ार की जानकारी रहना जरूरी है। इंट्राडे ट्रेंडिंग और स्टॉक मार्केट इनवेस्टमेंट में बड़ा अंतर है। आमतौर पर इंवेस्टिंग उसे कहते हैं जहां आप अपने पूंजी को लॉन्ग टर्म में लगाते हैं और उस डिपॉजिट्स पर कुछ रिटर्न कमाते हैं। ये निवेश कई सालों तक चलता है लेकिन इंट्राडे ट्रेडिंग में सबकुछ एक दिन में होता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग के लाभ

इंट्राडे ट्रेडिंग त्वरित लाभ की संभावना प्रदान करती है। इसमें एक दिन में सभी कारोबार हो जाता है। अगले दिन फिर एक नया ट्रेंड शुरू होता है। यह एक ही दिन में कई व्यापारिक अवसर प्रदान करता है, जिससे लिक्विटी और फ्लेक्सिबिलिटी में वृद्धि होती है। इंट्राडे ट्रेडर्स अपने संभावित रिटर्न को बढ़ाकर लीवरेज और मार्जिन ट्रेडिंग से भी लाभ उठा सकते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग की हानि

इंट्राडे ट्रेडिंग में कई जोखिम होते हैं। शेयर मार्केट में करीब 90-95% फीसदी निवेशकों को इंट्राडे में नुकसान होता है। इसका सबसे बड़ा कारण है यह है कि अधिकतर निवेशकों के पास मार्केट के बिहेवियर के पीछे के कारणों की समझ का अभाव होता है। अधिकतर लोग ‘कट लॉस’ और ‘बुक-प्रॉफिट’ की बारीकियों से अनजान होते हैं। इसके अलावा इसमें लगने वाला ट्रांसेक्शन कॉस्ट भी ज्यादा होता है। व्यापारियों को पूरे दिन बाजार पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, जिसके लिए महत्वपूर्ण समय और ध्यान की आवश्यकता है।

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