दिल्ली हाईकोर्ट ने CBDT से मांगा पार्टनर्स के बोनस पर टैक्स को लेकर स्पष्टीकरण, रिकवरी पर लगाई रोक

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कोर्ट का बड़ा फैसला, अब तक पार्टनरशिप फर्मों के पार्टनर्स को दिए जाने वाले बोनस पर टैक्स डिमांड पर सस्पेंस; CBDT को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश


नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने पार्टनरशिप फर्मों के पार्टनर्स को दिए जाने वाले बोनस पर टैक्स की मांग को लेकर आयकर विभाग (CBDT) से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही कोर्ट ने इस संबंध में चल रही टैक्स रिकवरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन की खंडपीठ ने CBDT को चार हफ्ते के अंदर लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या पार्टनरशिप फर्म द्वारा अपने पार्टनर्स को दिए गए बोनस को ‘व्यय’ माना जा सकता है या इसे फर्म का प्रॉफिट शेयरिंग समझा जाएगा।

याचिकाकर्ता फर्मों की ओर से वरिष्ठ वकील अजय वैद्यनाथन ने तर्क दिया कि कई वर्षों से चली आ रही प्रथा के अनुसार पार्टनर्स को दिया जाने वाला बोनस फर्म के खर्चे के रूप में स्वीकार किया जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में आयकर विभाग ने इसे प्रॉफिट का हिस्सा मानकर टैक्स डिमांड भेजना शुरू कर दिया है। इससे फर्मों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम राहत देते हुए कहा कि जब तक CBDT अपना स्पष्ट रुख नहीं स्पष्ट करता, तब तक किसी भी याचिकाकर्ता फर्म से इस मद पर टैक्स वसूली नहीं की जाएगी।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा पूरे देश की पार्टनरशिप फर्मों (खासकर CA, वकीलों, डॉक्टरों और कंसल्टेंसी फर्मों) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर कोर्ट का अंतिम फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आया तो हजारों फर्मों को राहत मिल सकती है।

यह मामला अब CBDT के लिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि विभाग को पूरे देश में एकसमान नीति स्पष्ट करनी होगी।

अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद निर्धारित की गई है।

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