ED की बड़ी कार्रवाई: IDFC फर्स्ट बैंक में 597 करोड़ के फ्रॉड मामले में 19 ठिकानों पर छापेमारी, 90 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज

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मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में ED का छापा; फर्जी लोन और फंड ट्रांसफर के जरिए हुई हेराफेरी, बैंक अधिकारियों और आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने IDFC फर्स्ट बैंक में हुए 597 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड मामले में आज 19 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।

ED के अधिकारियों ने मुंबई, ठाणे, पुणे, दिल्ली, गुड़गांव और अन्य शहरों में बैंक अधिकारियों, लोन एजेंटों और आरोपियों के आवासीय व व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी ली। छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।

जांच में अब तक क्या सामने आया?

  • बैंक के कुछ अधिकारियों और लोन एजेंटों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 597 करोड़ रुपये के लोन स्वीकृत किए।
  • ये लोन मुख्य रूप से फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों को दिए गए, जिनका इस्तेमाल फंड ट्रांसफर और मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया।
  • जांच में 90 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, जिनमें से अधिकांश आरोपियों और फर्जी फर्मों के हैं।
  • फंड का बड़ा हिस्सा विदेशी खातों में ट्रांसफर किया गया था, जिसकी जांच अब इंटरनेशनल कोऑर्डिनेशन से की जा रही है।

ED का बयान

ED ने प्रेस रिलीज में कहा:

“यह मामला बैंकिंग सिस्टम में गंभीर सिस्टेमेटिक फ्रॉड का है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन स्वीकृत कराए गए और फंड को अलग-अलग चैनलों से निकाल लिया गया। जांच जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।”

बैंक का रुख

IDFC फर्स्ट बैंक ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। बैंक ने दावा किया है कि यह मामला कुछ पूर्व कर्मचारियों और बाहरी एजेंटों से जुड़ा है और बैंक ने पहले ही इनके खिलाफ आंतरिक कार्रवाई की थी।

बाजार पर असर

  • IDFC फर्स्ट बैंक का शेयर आज 3.8% तक गिरा और ₹78 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
  • बैंकिंग सेक्टर में हल्का दबाव देखा गया, लेकिन अन्य बड़े बैंक शेयरों में ज्यादा गिरावट नहीं आई।

आगे क्या?

  • ED अब आरोपियों के विदेशी लिंक और फंड ट्रांसफर की जांच तेज करेगी।
  • बैंकिंग रेगुलेटर RBI से भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला बैंकिंग सेक्टर में फ्रॉड कंट्रोल और लोन अप्रूवल प्रक्रिया की सख्ती पर सवाल उठाएगा।

यह छापेमारी बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और फ्रॉड रोकथाम के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जांच के नतीजे आने पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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