FII की रिकॉर्ड बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी में लगातार गिरावट; कच्चे तेल की तेजी और कमजोर रुपया निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा, महंगाई बढ़ने का डर
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मार्च के पहले 15 दिनों में भारतीय शेयर बाजार से ₹52,704 करोड़ की भारी निकासी कर ली है। यह आंकड़ा इस साल की अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिकवाली में से एक है। मुख्य वजह ईरान-इजराइल जंग से बढ़ता तनाव है, जिसके चलते कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया और रुपया 92 के स्तर को पार कर गया।
FII बिकवाली के प्रमुख कारण
- कच्चे तेल में उछाल
- ब्रेंट क्रूड $100 के पार, WTI $96 के आसपास
- होर्मुज स्ट्रेट पर खतरे से भारत का 45-50% तेल आयात प्रभावित
- पेट्रोल-डीजल में ₹8-12 प्रति लीटर बढ़ोतरी का अनुमान
- रुपया 92 के पार
- डॉलर की मजबूती से रुपया 92.10-92.40 के बीच ट्रेड कर रहा है
- FII के लिए डॉलर में रिटर्न प्रभावित, भारत से पैसा निकालने की रफ्तार तेज
- जियो-पॉलिटिकल रिस्क
- इजराइल-ईरान जंग से वैश्विक बाजारों में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट
- अमेरिकी बाजार में भी गिरावट, FII उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं
बाजार पर असर
- सेंसेक्स पिछले 15 दिनों में 2,800 अंक गिरकर 82,500 के नीचे आ गया
- निफ्टी 850 अंक टूटकर 24,800 के आसपास ट्रेड कर रहा है
- मेटल, ऑटो, बैंकिंग और FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट
- DII ने ₹38,000 करोड़ की खरीदारी की, लेकिन FII बिकवाली को रोक नहीं पाई
विशेषज्ञों की चेतावनी
- कोटक सिक्योरिटीज: अगर होर्मुज स्ट्रेट 7-10 दिन बंद रहा तो महंगाई 5% के पार जा सकती है। बाजार में और दबाव बढ़ेगा।
- मोतीलाल ओसवाल: FII आउटफ्लो और तेल संकट से निफ्टी 24,000 के नीचे जा सकता है। सेफ-हेवन में सोना और गोल्ड ETF में निवेश बढ़ाएं।
- जेपी मॉर्गन: भारत के लिए तेल संकट सबसे बड़ा जोखिम है। अगर स्थिति बिगड़ी तो GDP ग्रोथ पर 0.5-1% का असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
ईरान-इजराइल जंग से कच्चे तेल और रुपए पर दबाव बढ़ने से FII ने 15 दिनों में ₹52,704 करोड़ निकाल लिए हैं। इससे बाजार में भारी गिरावट आई है। महंगाई बढ़ने और निर्यात प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। निवेशकों को सतर्क रहते हुए सोने-चांदी और डिफेंसिव सेक्टर पर नजर रखनी चाहिए। स्थिति अगले कुछ दिनों में और स्पष्ट हो जाएगी।