रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, लोन महंगा नहीं होगा: RBI ने ब्याज दर 5.25% पर बरकरार रखी; 2025 में कुल 1.25% की कटौती

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RBI की MPC बैठक में रेपो रेट स्थिर, न्यूट्रल स्टांस जारी; महंगाई 4.2% पर काबू, GDP ग्रोथ 7.4% का अनुमान; होम लोन और पर्सनल लोन की EMI में राहत बरकरार

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आज अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25% पर ही बरकरार रखा। यह लगातार तीसरी बैठक है जिसमें रेपो रेट स्थिर रखा गया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि महंगाई पर नियंत्रण बना हुआ है और अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, इसलिए फिलहाल और कटौती की जरूरत नहीं है।

2025 में RBI की नीति का सफर

  • 2025 में कुल कटौती: 1.25% (125 बेसिस पॉइंट्स)
  • कटौती का समय:
    • फरवरी 2025: 25 bps
    • जून 2025: 25 bps
    • सितंबर 2025: 25 bps
    • दिसंबर 2025: 50 bps
  • वर्तमान रेपो रेट: 5.25% (पिछले 14 महीनों का निचला स्तर)

महंगाई और GDP का अनुमान

  • खुदरा महंगाई (CPI): दिसंबर 2025 में 4.2% पर काबू, FY26 के लिए औसत अनुमान 4.5%
  • GDP ग्रोथ: FY26 के लिए 7.4% का अनुमान (पहले अनुमान से मेल खाता)
  • मौद्रिक नीति का स्टांस: न्यूट्रल (Neutral) बरकरार

RBI ने कहा कि महंगाई अब कंट्रोल में है, लेकिन खाद्य महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं पर नजर रखी जा रही है।

आम आदमी पर क्या असर?

  • होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन: EMI में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। पिछले साल की 1.25% कटौती का फायदा अभी भी मिल रहा है।
  • ₹20 लाख के 20 साल के होम लोन पर: पिछले साल की तुलना में मासिक EMI में ₹1,100-1,300 की बचत बनी हुई है।
  • बैंक FD और बचत खाते: ब्याज दरें पहले ही कम हो चुकी हैं, फिलहाल कोई और कटौती नहीं।
  • महंगाई से राहत: महंगाई 4% के आसपास बनी रहने से घरेलू खर्च पर दबाव कम रहेगा।

बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर

  • शेयर बाजार: रेपो रेट स्थिर रहने से बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में हल्की तेजी की संभावना।
  • FII फ्लो: स्थिर नीति से विदेशी निवेशकों का भरोसा बना रहेगा।
  • रुपया: डॉलर के मुकाबले 91.50-92 के दायरे में स्थिर रहने की उम्मीद।
  • अगली बैठक: अप्रैल 2026 में अगली MPC बैठक, जहां महंगाई और GDP डेटा के आधार पर फैसला होगा।

निष्कर्ष

RBI ने फिलहाल रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखकर अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने की कोशिश की है। लोन महंगे नहीं होंगे और पिछले साल की कटौतियों का फायदा बरकरार रहेगा। महंगाई पर काबू और GDP ग्रोथ के अनुमान से अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही है। अगले कुछ महीनों में महंगाई और वैश्विक संकेतों पर RBI की नजर रहेगी।

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