रेलिगेयर एंटरप्राइजेज ने फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस कारोबार को दो अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटने की योजना

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नई दिल्ली: रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (REL) के बोर्ड ने कंपनी के फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस कारोबार को दो अलग-अलग लिस्टेड इकाइयों में विभाजित (डिमर्जर) करने की योजना को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला बर्मन परिवार (बर्मन ग्रुप) के समर्थन से लिया गया है, जो कंपनी के प्रमुख प्रमोटर हैं।

डिमर्जर प्लान की मुख्य बातें

  • रेलिगेयर फाइनेंशियल सर्विसेज (मौजूदा REL का कोर बिजनेस) में ब्रोकरेज, एसेट मैनेजमेंट, लेंडिंग और अन्य फाइनेंशियल सर्विसेज रहेंगी।
  • रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस (या नई नाम वाली इकाई) में हेल्थ इंश्योरेंस का पूरा कारोबार जाएगा।
  • दोनों कंपनियां अलग-अलग लिस्टेड होंगी (BSE और NSE पर)।
  • शेयरहोल्डर्स को अनुपात के आधार पर दोनों नई कंपनियों में शेयर मिलेंगे (अनुपात की घोषणा बाद में)।
  • डिमर्जर प्रक्रिया पूरी होने की संभावित समयसीमा: 12–18 महीने (अप्रूवल्स और कोर्ट प्रक्रिया के बाद)।

कंपनी का बयान

रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के चेयरमैन और बर्मन परिवार के प्रतिनिधि मलविंदर मोहन सिंह ने कहा:

“यह डिमर्जर दोनों बिजनेस को उनकी पूरी क्षमता के साथ विकसित होने का मौका देगा। फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थ इंश्योरेंस दोनों अलग-अलग ग्रोथ ट्रैजेक्ट्री पर हैं। अलग होने से दोनों कंपनियां ज्यादा फोकस्ड, ट्रांसपेरेंट और वैल्यू-अनलॉकिंग बनेंगी।”

बाजार पर तत्काल असर

  • निवेशकों में सकारात्मक सेंटिमेंट है क्योंकि डिमर्जर से वैल्यू अनलॉक होने की उम्मीद है।
  • ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि अलग होने के बाद दोनों इकाइयों की कुल वैल्यूएशन वर्तमान से 15–25% ज्यादा हो सकती है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

  • फोकस्ड ग्रोथ — फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थ इंश्योरेंस दोनों अलग-अलग रेगुलेटरी और ग्रोथ डायनामिक्स वाले बिजनेस हैं।
  • वैल्यू अनलॉक — अलग लिस्टिंग से निवेशकों को दोनों बिजनेस की सही वैल्यूएशन मिलेगी।
  • कैपिटल रेजिंग में आसानी — दोनों कंपनियां अलग-अलग फंड जुटा सकेंगी और अपने सेक्टर के हिसाब से काम कर सकेंगी।
  • बर्मन परिवार की रणनीति — परिवार अब दोनों बिजनेस को अलग-अलग ग्रोथ पाथ पर ले जाना चाहता है।

आगे क्या?

  • कंपनी जल्द ही डिमर्जर स्कीम की विस्तृत जानकारी शेयरहोल्डर्स और स्टॉक एक्सचेंज को सौंपेगी।
  • NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) से मंजूरी, शेयरहोल्डर अप्रूवल और अन्य रेगुलेटरी क्लियरेंस के बाद प्रक्रिया पूरी होगी।
  • दोनों नई कंपनियों की अलग-अलग लिस्टिंग 2027 की पहली या दूसरी तिमाही तक संभावित है।

यह डिमर्जर भारतीय फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में एक बड़ा कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग कदम होगा, जो निवेशकों को दो अलग-अलग ग्रोथ स्टोरीज में हिस्सेदारी का मौका देगा।

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