CPI में 0.4% की बढ़ोतरी, सब्जियां-फल-दालें महंगी; तेल संकट से महंगाई 4% के पार जाने की आशंका, RBI के लिए नई चुनौती
फरवरी 2026 में भारत की रिटेल महंगाई (CPI) बढ़कर 3.21% पर पहुंच गई, जो जनवरी के 2.81% से 0.4% अधिक है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की चीजों में तेजी से बढ़ती कीमतों ने महंगाई को ऊपर धकेला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और बढ़ सकती है।
महंगाई के प्रमुख कारण
- खाद्य महंगाई (Food CPI): 5.12% पर पहुंची (जनवरी में 4.3%)
- सब्जियां: 18.4% महंगी
- फल: 12.7% महंगी
- दालें और अनाज: 8-10% तक की बढ़ोतरी
- दूध, मांस, मछली और तेल में भी उछाल
- ईंधन और लाइट: 2.1% (पेट्रोल-डीजल में हल्की नरमी के बावजूद)
- कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर): 3.8% पर स्थिर
इजराइल-ईरान जंग का खतरा
- होर्मुज स्ट्रेट से भारत का 45-50% कच्चा तेल आयात होता है।
- ब्रेंट क्रूड $92 के पार पहुंच चुका है।
- अगर यह रूट 7-10 दिन के लिए भी प्रभावित हुआ तो पेट्रोल-डीजल में ₹5-10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी संभव।
- इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दूसरा दौर का दबाव आएगा।
- विशेषज्ञों का अनुमान: मार्च-अप्रैल में CPI 4.0-4.5% तक पहुंच सकती है।
RBI और सरकार पर दबाव
- RBI ने अभी रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है।
- अगर महंगाई 4% के पार जाती है तो रेट कट की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं।
- सरकार ने कहा है कि वह आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने और सब्सिडी के जरिए दबाव कम करने की कोशिश करेगी।
निवेशकों के लिए सलाह
- सोना-चांदी: महंगाई और जियो-पॉलिटिकल रिस्क से सेफ-हेवन डिमांड बढ़ेगी।
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियां: BPCL, IOC, HPCL में शॉर्ट-टर्म प्रेशर, लेकिन लॉन्ग-टर्म में फायदा।
- FMCG और कंज्यूमर स्टॉक्स: महंगाई से मार्जिन पर दबाव, सतर्क रहें।
निष्कर्ष
फरवरी में रिटेल महंगाई का बढ़कर 3.21% पर पहुंचना चिंता का विषय है। खाने-पीने की चीजों में तेजी से बढ़ती कीमतें और इजराइल-ईरान जंग से तेल संकट का खतरा महंगाई को और ऊपर धकेल सकता है। आम आदमी की जेब पर असर पड़ना तय है। सरकार और RBI को अब सख्त कदम उठाने होंगे।