रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर: पहली बार 1 डॉलर = ₹95.22, मोबाइल, सोना, तेल और विदेशी सामान महंगा पड़ेगा

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मध्य पूर्व तनाव, FII की भारी बिकवाली और मजबूत डॉलर के कारण रुपया 95.22 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर; आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर, महंगाई बढ़ने का खतरा


भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया पहली बार 95.22 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। दिनभर के कारोबार में रुपया 95.08 से 95.35 के बीच घूमता रहा और अंत में 95.18 पर बंद हुआ।

यह गिरावट पिछले कई दिनों से जारी है और इस महीने रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 3.8% कमजोर हो चुका है।

रुपया क्यों इतना कमजोर हुआ?

  • मध्य पूर्व तनाव: ईरान-इजराइल संघर्ष की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। भारत 85% तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से रुपए पर दबाव बढ़ा।
  • FII की लगातार बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस महीने अब तक ₹28,000 करोड़ से ज्यादा की नेट बिकवाली की है।
  • मजबूत अमेरिकी डॉलर: US Dollar Index (DXY) 108 के ऊपर पहुंच गया है।
  • ट्रेड डेफिसिट: बढ़ता तेल आयात बिल व्यापार घाटे को और बढ़ा रहा है।

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

  • मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स: 5-8% महंगे हो सकते हैं।
  • सोना और चांदी: कीमतें ₹2,000-3,000 प्रति 10 ग्राम तक बढ़ सकती हैं।
  • पेट्रोल-डीजल: ₹4-7 प्रति लीटर तक महंगे होने का खतरा।
  • विदेशी सामान: आयातित प्रोडक्ट्स (कॉस्मेटिक्स, लग्जरी सामान, टायर आदि) महंगे होंगे।
  • महंगाई: कुल CPI महंगाई 0.5-0.8% बढ़ने की आशंका।

विशेषज्ञों की राय

  • क्रिसिल रिसर्च: अगर कच्चा तेल $95 के ऊपर चला गया तो रुपया 96-97 के स्तर को भी छू सकता है।
  • मोतीलाल ओसवाल: शॉर्ट टर्म में रुपया कमजोर रह सकता है। निवेशकों को गोल्ड और गोल्ड ETF में एक्सपोजर बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।
  • FIEO: निर्यातकों को फायदा होगा, लेकिन आयातकों और आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा।

RBI की भूमिका

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) स्थिति पर नजर रखे हुए है। सूत्रों के अनुसार, RBI ने आज भी फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप किया है, लेकिन अत्यधिक हस्तक्षेप से बच रहा है।

निष्कर्ष

रुपया डॉलर के मुकाबले 95.22 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। मध्य पूर्व में बने तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपए की कमजोरी का मुख्य कारण हैं। आम आदमी को मोबाइल, सोना, पेट्रोल और कई आयातित सामानों की महंगाई का असर झेलना पड़ सकता है। सरकार और RBI को अब तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि मुद्रा और महंगाई दोनों पर नियंत्रण रखा जा सके।

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