सिल्वर ETF एक महीने में 15% टूटे, गोल्ड ETF 3% चढ़े: निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
सोने-चांदी के रुझान में बड़ा अंतर, सिल्वर की गिरावट से निवेशकों में हड़कंप; क्या करें-होल्ड, बेचें या खरीदें? जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह
मुंबई: पिछले एक महीने में सिल्वर ETF में भारी गिरावट देखी गई है। प्रमुख सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) औसतन 14–15% तक टूट चुके हैं, जबकि उसी अवधि में गोल्ड ETF ने 2.8–3.2% तक का मुनाफा दिया है। इस अंतर ने निवेशकों के बीच भ्रम और चिंता दोनों पैदा कर दी है।
आंकड़े एक नजर में (1 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक)
| ETF प्रकार | 1 महीने का रिटर्न | प्रमुख कारण |
|---|---|---|
| सिल्वर ETF | -14.2% से -15.8% | औद्योगिक मांग में कमी, मजबूत डॉलर, FII बिकवाली |
| गोल्ड ETF | +2.8% से +3.2% | सेफ-हेवन डिमांड, महंगाई हेज, जियो-पॉलिटिकल टेंशन |
सिल्वर ETF क्यों गिरे?
- औद्योगिक मांग में सुस्ती — सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सेक्टर में मंदी से सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड घटी
- मजबूत अमेरिकी डॉलर — डॉलर इंडेक्स (DXY) 107.50 के ऊपर, जिससे कमोडिटी पर दबाव
- FII की लगातार बिकवाली — पिछले 45 दिनों में सिल्वर ETF से FII ने ₹1,800 करोड़ से ज्यादा निकाले
- सोने से बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड — निवेशक सोने को ज्यादा सेफ मान रहे हैं, जिससे सिल्वर में रोटेशन हुआ
गोल्ड ETF क्यों चढ़े?
- सेफ-हेवन डिमांड — US-ईरान तनाव, ट्रम्प की टैरिफ नीतियां और वैश्विक अनिश्चितता से गोल्ड की मांग बढ़ी
- कमजोर डॉलर की उम्मीद — फेड से और रेट कट की संभावना से गोल्ड को सपोर्ट
- इन्फ्लेशन हेज — भारत में महंगाई 4.5% के आसपास बनी हुई है
निवेशकों को क्या करना चाहिए? — एक्सपर्ट्स की सलाह
- सिल्वर ETF में मौजूदा निवेशक
- अगर होल्डिंग लॉन्ग-टर्म (3–5 साल) है → अभी बेचने की जरूरत नहीं, गिरावट खरीदारी का मौका दे सकती है
- अगर शॉर्ट-टर्म (6–12 महीने) है → 10–15% और गिरावट पर स्टॉप-लॉस लगाएं
- औद्योगिक मांग में सुधार के संकेत मिलने पर ही नया निवेश करें
- गोल्ड ETF में निवेश
- अभी भी सेफ-हेवन के रूप में मजबूत
- पोर्टफोलियो में 10–15% तक गोल्ड एक्सपोजर बनाए रखें
- अगर $2,900–$3,000 के आसपास ग्लोबल गोल्ड प्राइस है तो डिप्स पर खरीदारी करें
- नया निवेश करने वाले
- गोल्ड ETF या गोल्ड फंड्स में 60–70% और सिल्वर ETF में 30–40% अलोकेशन रखें
- सिल्वर में अभी भी 10–15% और गिरावट की गुंजाइश है, इसलिए स्टैगर्ड (SIP/STP) तरीके से निवेश करें
- कुल पोर्टफोलियो में प्रीशियस मेटल्स का हिस्सा 10–20% से ज्यादा न हो
विशेषज्ञों की राय
- मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड: “सिल्वर अभी भी ओवरसोल्ड है, लेकिन अगले 6 महीने में इंडस्ट्रियल रिकवरी से रिबाउंड संभव।”
- ICICI प्रूडेंशियल AMC: “गोल्ड अभी भी प्राइमरी हेज बना हुआ है। सिल्वर में सिलेक्शन के साथ ही निवेश करें।”
- क्रिसिल रिसर्च: “सिल्वर-गोल्ड रेशियो अब 85 के करीब है (ऐतिहासिक औसत 60–70), सिल्वर में वैल्यू दिख रही है।”
निष्कर्ष
पिछले एक महीने में सिल्वर ETF 15% टूटे हैं, जबकि गोल्ड ETF 3% चढ़े हैं। यह अंतर निवेशकों के लिए सोने को सेफ-हेवन और सिल्वर को हाई-रिस्क-हाई-रिवॉर्ड एसेट के रूप में देखने का संकेत है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए सिल्वर में डिप्स पर खरीदारी का मौका है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में सावधानी बरतें। पोर्टफोलियो में गोल्ड-सिल्वर का संतुलित मिश्रण अभी भी सबसे अच्छा रिस्क-रिटर्न दे सकता है।