भारत में थोक महंगाई 11 महीने के उच्चतम स्तर पर: फरवरी में 2.13% पहुंची

0

खाद्य और ईंधन के दामों में उछाल से WPI में तेजी, ईरान-इजराइल तनाव से तेल संकट का असर जारी; RBI के लिए नई चुनौती

फरवरी 2026 में भारत की थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 2.13% पर पहुंच गई, जो पिछले 11 महीनों का उच्चतम स्तर है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में WPI 1.82% थी, जो फरवरी में 0.31% बढ़ गई।

थोक महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण

  • खाद्य वस्तुएं: सब्जियां, फल, दालें और अनाज में तेजी से बढ़ती कीमतें
  • ईंधन और बिजली: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (ब्रेंट $90+ के स्तर पर)
  • निर्माण सामग्री: स्टील, सीमेंट और अन्य सामग्रियों में लागत वृद्धि
  • वैश्विक तेल संकट: ईरान-इजराइल युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा, जिससे तेल आयात महंगा हुआ

सेक्टर-वाइज WPI आंकड़े (फरवरी 2026)

  • खाद्य उत्पाद: +4.8% (सब्जियां +18-20%, फल +12-15%)
  • ईंधन और बिजली: +3.2%
  • निर्मित उत्पाद: +1.9%
  • प्राथमिक वस्तुएं: +2.6%

अर्थव्यवस्था पर असर

  • रिटेल महंगाई (CPI) भी फरवरी में 3.21% पर पहुंच चुकी है।
  • थोक महंगाई बढ़ने से आने वाले महीनों में रिटेल महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है।
  • अगर होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बना रहा तो कच्चा तेल $100 के पार जाने की आशंका है, जिससे पेट्रोल-डीजल में ₹8-10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है।
  • इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और उपभोक्ता सामान महंगे होंगे।

RBI और सरकार के लिए चुनौती

  • RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है, लेकिन महंगाई 4% के पार जाने पर रेट कट की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं।
  • सरकार ने कहा है कि वह आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने और सब्सिडी के जरिए दबाव कम करने की कोशिश करेगी।

निष्कर्ष

फरवरी में थोक महंगाई का 11 महीने के उच्चतम स्तर 2.13% पर पहुंचना चिंता का विषय है। खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतें और इजराइल-ईरान जंग से तेल संकट महंगाई को और बढ़ा सकता है। आम आदमी की जेब पर असर पड़ना तय है। सरकार और RBI को अब सख्त कदम उठाने होंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.