ओला इलेक्ट्रिक Q2 में घाटा घटा लेकिन रेवेन्यू 43% गिरा: नेट लॉस ₹418 करोड़, शेयर एक महीने में 10% नीचे; ऑटो बिजनेस EBITDA पॉजिटिव
52,666 यूनिट डिलीवरी के बावजूद चुनौतियां बरकरार, FY26 के लिए रेवेन्यू गाइडेंस ₹3,000-3,200 करोड़; निवेशकों में मिश्रित प्रतिक्रिया
इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस पिछले साल के ₹495 करोड़ से घटकर ₹418 करोड़ रह गया, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, रेवेन्यू 43% गिरकर ₹690 करोड़ हो गया, जो Q2 FY25 के ₹1,214 करोड़ से काफी कम है। यह गिरावट डिलीवरी में कमी और बाजार चुनौतियों का नतीजा है, जहां कंपनी ने 52,666 वाहन डिलीवर किए। शेयरों में एक महीने में 10% की गिरावट आई, जो NSE पर ₹47.56 तक फिसल गया। फिर भी, ऑटो बिजनेस का EBITDA पहली बार पॉजिटिव (0.3%) हो गया, जो लागत नियंत्रण और मार्जिन सुधार को दर्शाता है।
वित्तीय प्रदर्शन: घाटा कम लेकिन रेवेन्यू में बड़ी गिरावट
ओला इलेक्ट्रिक के Q2 FY26 रिजल्ट्स में मिश्रित संकेत मिले हैं। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 43% घटकर ₹690 करोड़ रह गया, जो डिलीवरी में कमी (पिछले साल की तुलना में कम) और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से प्रभावित हुआ। EBITDA लॉस ₹379 करोड़ से घटकर ₹203 करोड़ हो गया, और ऑटो सेगमेंट का EBITDA 0.3% पॉजिटिव रहा, जो -5.3% से उलटफेर दर्शाता है। ग्रॉस मार्जिन 30.7% पर पहुंच गया, जो ICE टू-व्हीलर पीयर्स से बेहतर है।
कंपनी ने H2 FY26 के लिए ऑटो डिलीवरी 1 लाख यूनिट का टारगेट रखा है, और FY26 कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹3,000-3,200 करोड़ का अनुमान लगाया है। सेल बिजनेस में 2.5 GWh क्षमता चालू हुई, जो भारत का पहला गीगावाट-स्केल फैसिलिटी है।
शेयर परफॉर्मेंस: एक महीने में 10% की गिरावट
रिजल्ट्स के ऐलान के बाद ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में 5% की गिरावट आई, जो NSE पर ₹47.56 तक फिसल गए। पिछले एक महीने में शेयर 10% नीचे आ चुके हैं, जो रेवेन्यू गिरावट और बाजार चुनौतियों से प्रभावित है। हालांकि, कंपनी का मार्केट कैप अभी भी ₹20,000 करोड़ से ऊपर है। विशेषज्ञों का कहना है कि EBITDA पॉजिटिव होना लॉन्ग-टर्म के लिए सकारात्मक है, लेकिन वॉल्यूम ग्रोथ पर फोकस जरूरी।
रणनीतिक पहल: ओला शक्ति लॉन्च और भविष्य की योजनाएं
कंपनी ने Q2 में ‘ओला शक्ति’ लॉन्च किया, जो भारत का पहला रेसिडेंशियल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) है। Q4 FY26 में इससे ₹100 करोड़ रेवेन्यू की उम्मीद है, और FY27 में ₹1,000-1,200 करोड़। ऑटो सेगमेंट में कैपेक्स Q3-Q4 में ₹100-150 करोड़ रहेगा, और FY26 के अंत तक फ्री कैश फ्लो पॉजिटिव होने का लक्ष्य है।
सीईओ भाविश अग्रवाल ने कहा, “यह EBITDA प्रॉफिटेबिलिटी का महत्वपूर्ण इन्फ्लेक्शन पॉइंट है, जो सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में कदम है।” कंपनी ने फेराइट मोटर और इन-हाउस ADAS/ABS सिस्टम विकसित किए, जो रेयर-अर्थ इंपोर्ट पर निर्भरता कम करेंगे।
| मुख्य आंकड़े | Q2 FY26 | YoY बदलाव (%) |
|---|---|---|
| रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस | ₹690 करोड़ | -43 |
| नेट लॉस | ₹418 करोड़ | -15.6 |
| EBITDA (कंसोलिडेटेड) | ₹2 करोड़ (पॉजिटिव) | सुधार |
| ऑटो डिलीवरी | 52,666 यूनिट | – |
| ग्रॉस मार्जिन (ऑटो) | 30.7% | +510 bps |
आंकड़े: कंपनी रिजल्ट्स से।
निष्कर्ष
ओला इलेक्ट्रिक के Q2 रिजल्ट्स में घाटा कम होना सकारात्मक है, लेकिन रेवेन्यू गिरावट और शेयरों की कमजोरी चुनौतियां दर्शाती है। EBITDA पॉजिटिव होना और ओला शक्ति जैसे इनोवेशन कंपनी को मजबूत बनाएंगे। FY26 के लिए गाइडेंस आशावादी है, लेकिन प्रतिस्पर्धा और डिमांड पर नजर रखनी होगी। निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म होल्डर्स के लिए अवसर है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में सतर्कता बरतें। EV सेक्टर की यह गतिविधि भारत की ग्रीन मोबिलिटी को गति देगी।