कोई भी काम शुरू करने की यही सही उम्र है, आइडिया सोचिए और मार्केट में उतरिए, मार्केट से बड़ा कोई गुरु नहीं है – अनुभव
दुबे एमपी बिजनेस नेटवर्क समिट 2026 के अंतिम दिन स्टार्टअप सोच, नेटवर्किंग पावर और ग्रीन एनर्जी पर हुई चर्चा
भोपाल। बिजनेस नेटवर्क इंटरनेशनल (बीएनआई) भोपाल चैप्टर द्वारा आयोजित एमपी बिजनेस नेटवर्क समिट 2026 का समापन रविवार को हुआ। दो दिवसीय इस समिट ने मध्यप्रदेश के उभरते स्टार्टअप्स, उद्यमियों और बिजनेस लीडर्स को एक ऐसा मंच दिया, जहाँ अनुभव, नेटवर्किंग और भविष्य की रणनीतियों पर खुलकर संवाद हुआ। अंतिम दिन बिजनेस नेटवर्किंग, लोकलाइज्ड ग्रीन ट्रांजिशन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) इन बिजनेस जैसे विषयों पर पैनल डिस्कशन आयोजित किए गए, जिनमें बदलते कारोबारी परिदृश्य पर गहरी चर्चा हुई। चाय सुट्टा बार के फाउंडर अनुभव दुबे ने जर्नी ऑफ बिल्डिंग एन इंडियन ब्रांड विषय पर चर्चा की। अनुभव दुबे ने बताया कि उनका जन्म रीवा के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ, जहां पिता की इच्छा थी कि वे पढ़-लिखकर आईएएस बनें। लेकिन मंच पर अपने विचार रखने की चाह उन्हें बचपन से ही अलग बनाती थी। उन्होंने कहा कि स्कूल में थॉट ऑफ द डे पढ़ने के बजाय वे अपने शब्दों में बात करना चाहते थे। पढ़ाई के बाद वे इंदौर आए और वर्ष 2015 में बिना परिवार को बताए गर्ल्स हॉस्टल के पास एक छोटी सी चाय की दुकान शुरू की। हमारा टारगेट जेन-जी था, इसलिए नाम रखा चाय सुट्टा बार रखा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें सामाजिक आलोचना, असफलता की भविष्यवाणियां और यहां तक कि नारकोटिक्स विभाग की कार्रवाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे अपने सफर का हिस्सा माना।
कोरोना का दौर चुनौतीपूर्ण था
अनुभव दुबे ने बताया कि जब स्टार्टअप रफ्तार पकड़ रहा था, तभी कोरोना महामारी आ गई, जो उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण दौर था। जब बिजनेस ठप था, तब हमने स्ट्रैटेजी बनाई। इसी सोच का परिणाम रहा कि वर्ष 2020 में दुबई में पहला इंटरनेशनल आउटलेट शुरू हुआ और हाल ही में कनाडा में छह नए आउटलेट्स की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीय कुजिन की जबरदस्त मांग होने के बावजूद भारत का कोई बड़ा ग्लोबल फूड ब्रांड नहीं है। उन्होंने युवाओं से कहा कि व्यापार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन असली फर्क इस बात से पड़ता है कि हम उन्हें कैसे मैनेज करते हैं। कोई भी काम शुरू करने की सही उम्र यही है आइडिया सोचिए और मार्केट में उतरिए, क्योंकि मार्केट से बड़ा कोई गुरु नहीं, उनका यह संदेश खास तौर पर युवा स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणास्रोत बना।
ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल एन्वायरमेंट पर हुई चर्चा
अगले सत्र में लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) मोनीष आहूजा और कुकी के फाउंडर कुशाग्र भाटिया ने लोकलाइज्ड ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल एन्वायरमेंट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाला दशक उन व्यवसायों का होगा जो मुनाफे के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता देंगे। उन्होंने बताया कि लोकलाइज्ड ग्रीन ट्रांजिशन का अर्थ है स्थानीय जरूरतों के अनुसार सोलर, बायो-एनर्जी और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को अपनाना। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, बल्कि स्थानीय रोजगार और स्टार्टअप अवसर भी पैदा होते हैं। पैनल में इस बात पर जोर दिया गया कि जीरो कार्बन एमिशन अब केवल पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म बिजनेस स्ट्रैटेजी बन चुका है। कुशाग्र भाटिया ने कहा कि स्टार्टअप्स के पास ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में इनोवेशन करने की सबसे ज्यादा संभावनाएँ हैं चाहे वह सस्टेनेबल पैकेजिंग हो, एनर्जी एफिशिएंट प्रोडक्ट्स हों या ग्रीन सप्लाई चेन मॉडल। यदि आज से ही ग्रीन सोच को बिजनेस मॉडल का हिस्सा बना लिया जाए, तो भविष्य में यही प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनेगी। अंत में इम्पोर्टेंस ऑफ बिजनेस नेटवर्किंग एंड हाउ इट हेल्प्स इन बिजनेस ग्रोथ और एआई इन बिजनेस जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज स्टार्टअप इकोसिस्टम में नेटवर्किंग केवल संपर्क बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मेंटरशिप, फंडिंग और स्केल-अप का सबसे मजबूत जरिया बन चुकी है। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को बिजनेस प्रोसेस, कस्टमर एनालिटिक्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी का गेम-चेंजर बताया। इस अवसर पर खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, बीएनआई के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रदीप करम्बेलकर, सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अरुणव गुप्ता सहित कई उद्योग विशेषज्ञ और 500 से अधिक नेटवर्क्स उपस्थित हुए।