कच्चे तेल और जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच गोल्ड की चमक फीकी पड़ी; निवेशकों ने फरवरी में गोल्ड ETF से पैसा निकाला, जनवरी की रिकॉर्ड खरीदारी के बाद बड़ा उलटफेर
भोपाल: फरवरी 2026 में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETF) में निवेश में भारी गिरावट दर्ज की गई है। डेटा के अनुसार, फरवरी में गोल्ड ETF में कुल ₹5,255 करोड़ का ही निवेश हुआ, जो जनवरी 2026 के रिकॉर्ड ₹24,000 करोड़ से 78% कम है। यह गिरावट पिछले कई महीनों की सबसे तेज मानी जा रही है।
जनवरी vs फरवरी: निवेश में बड़ा अंतर
- जनवरी 2026: ₹24,000 करोड़ (ऑल-टाइम हाई)
- फरवरी 2026: ₹5,255 करोड़
- कमी: लगभग 78% (₹18,745 करोड़ कम)
गिरावट के मुख्य कारण
- कच्चे तेल में उछाल और महंगाई का डर कम इजराइल-ईरान तनाव के बावजूद तेल की कीमतें हाल के दिनों में स्थिर हुई हैं, जिससे गोल्ड की सेफ-हेवन डिमांड में कमी आई।
- शेयर बाजार में रिकवरी फरवरी के मध्य से सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत उछाल आया। निवेशकों ने गोल्ड ETF से पैसा निकालकर इक्विटी में लगाया।
- गोल्ड की कीमतों में स्थिरता MCX गोल्ड पिछले 20 दिनों में ₹88,000–₹90,000 के दायरे में रहा, जिससे नया निवेश आकर्षित नहीं हो पाया।
- FII और रिटेल का रुख FII ने गोल्ड ETF से पैसा निकाला, जबकि रिटेल निवेशक भी शेयर बाजार की रिकवरी में शामिल हुए।
गोल्ड ETF का प्रदर्शन (फरवरी 2026)
- कुल औसत रिटर्न: +1.2% से +2.1% (मासिक)
- प्रमुख फंड्स: Nippon India ETF Gold BeES (+1.8%), SBI Gold ETF (+1.6%), HDFC Gold ETF (+1.5%)
- इनफ्लो में सबसे ज्यादा गिरावट: Nippon India और SBI गोल्ड ETF में
विशेषज्ञों की राय
- मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड: फरवरी में इक्विटी की रिकवरी से गोल्ड में पैसा शिफ्ट हुआ। लेकिन लॉन्ग-टर्म में गोल्ड अभी भी पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- ICICI प्रूडेंशियल AMC: गोल्ड ETF में गिरावट अस्थायी है। जियो-पॉलिटिकल रिस्क बढ़ने पर दोबारा इनफ्लो आएगा।
- क्रिसिल रेटिंग्स: गोल्ड अभी भी इन्फ्लेशन और करेंसी रिस्क के खिलाफ सबसे अच्छा हेज है।
निवेशकों के लिए सलाह
- लॉन्ग-टर्म निवेशक: अभी गोल्ड ETF में SIP जारी रखें या डिप्स पर खरीदारी बढ़ाएं।
- शॉर्ट-टर्म ट्रेडर: सिल्वर और गोल्ड दोनों में वोलेटिलिटी का फायदा उठाएं।
- पोर्टफोलियो में हिस्सा: कुल निवेश का 8–15% गोल्ड/सिल्वर में रखें।
निष्कर्ष
जनवरी में रिकॉर्ड ₹24,000 करोड़ निवेश के बाद फरवरी में गोल्ड ETF में 78% की गिरावट आई है। बाजार की रिकवरी और तेल की कीमतों में स्थिरता मुख्य वजह रही। हालांकि, गोल्ड लॉन्ग-टर्म में मजबूत हेज बना हुआ है और जियो-पॉलिटिकल रिस्क बढ़ने पर दोबारा चमक सकता है। निवेशक अभी धैर्य रखें और डिप्स का फायदा उठाएं।