अमेरिका फिर से भारत पर टैरिफ थोपने की तैयारी में: 16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार सिद्ध होने पर भारी शुल्क लगेगा
ट्रम्प प्रशासन ने सेक्शन 301 जांच फिर से शुरू की, भारत सहित कई देशों पर नई टैरिफ की तलवार; निर्यातकों में चिंता, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संकट के बादल
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने भारत सहित 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ सेक्शन 301 जांच फिर से शुरू करने की घोषणा कर दी है। जांच में अगर अनुचित व्यापार प्रथाएं (जैसे सब्सिडी, डंपिंग, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी उल्लंघन या बाजार पहुंच में बाधा) सिद्ध हुईं, तो इन देशों पर भारी टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
ट्रम्प प्रशासन ने इसे ‘अमेरिका फर्स्ट ट्रेड पॉलिसी’ का हिस्सा बताया है। भारत पर पहले से ही कुछ सेक्टरों में टैरिफ का दबाव बना हुआ है और अब यह जांच नई टैरिफ की आशंका को और बढ़ा रही है।
जांच के मुख्य बिंदु
- कुल देश: 16 (भारत, चीन, वियतनाम, मैक्सिको, कनाडा, ब्राजील, इंडोनेशिया, थाईलैंड आदि शामिल)
- जांच के दायरे:
- सब्सिडी और राज्य सहायता
- डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण
- इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (पेटेंट, कॉपीराइट) उल्लंघन
- बाजार पहुंच में गैर-टैरिफ बाधाएं
- डिजिटल ट्रेड और डेटा लोकलाइजेशन नियम
- संभावित टैरिफ: 10% से 60% तक (सेक्टर के अनुसार)
- समयसीमा: जांच पूरी होने में 6-12 महीने लग सकते हैं, लेकिन प्रारंभिक निष्कर्ष 3-4 महीने में आ सकते हैं।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
- प्रभावित सेक्टर: फार्मास्यूटिकल्स (जेनरिक दवाएं), आईटी सर्विसेज, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, स्टील, एल्युमिनियम, केमिकल्स और कृषि उत्पाद
- निर्यात पर खतरा: भारत का अमेरिका को सालाना निर्यात ~$85-90 बिलियन है। अगर 10-25% टैरिफ लगा तो सालाना $8-20 बिलियन का नुकसान संभव।
- रुपया और महंगाई: डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया 92-94 के स्तर तक जा सकता है।
- शेयर बाजार: फार्मा (सन, डॉ. रेड्डीज), आईटी (TCS, इंफोसिस), टेक्सटाइल और ऑटो एंसेलरी शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
- FIEO: यह जांच राजनीतिक लगती है। हमें तत्काल कूटनीतिक स्तर पर बातचीत तेज करनी होगी।
- CII: भारत को अपनी सब्सिडी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए, लेकिन अमेरिका के साथ ट्रेड डील को बचाना जरूरी है।
- गोल्डमैन सैक्स: यह भारत के लिए नया जोखिम है। अगर टैरिफ लगे तो GDP ग्रोथ पर 0.3-0.5% का असर पड़ सकता है।
आगे क्या?
- ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि जांच निष्पक्ष होगी, लेकिन अमेरिका के हितों की रक्षा” सर्वोपरि रहेगी।
- भारत ने जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन फिलहाल कूटनीतिक बातचीत पर जोर है।
- अगले 3-4 महीने में जांच के शुरुआती निष्कर्ष आने की संभावना।
यह कदम भारत-अमेरिका ट्रेड रिलेशंस में नया तनाव पैदा कर सकता है और भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।