भारत-न्यूजीलैंड FTA पर ऐतिहासिक मुहर: व्यापार दोगुना होने की उम्मीद, कीवी-वाइन सस्ते होंगे
5000 भारतीय प्रोफेशनल्स को वर्क वीजा, 20 अरब डॉलर निवेश का रास्ता खुला
भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज नई दिल्ली में औपचारिक रूप से साइन हो गया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने इसे “एक जेनरेशन में एक बार” होने वाला ऐतिहासिक समझौता बताया है।
मुख्य फायदे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए
- न्यूजीलैंड से आने वाले कीवीफ्रूट, वाइन, एवोकाडो, चेरी, ब्लूबेरी और अन्य हॉर्टिकल्चर प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम या खत्म होने से ये सामान सस्ते होंगे।
- भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड की वाइन पर 150% तक का टैरिफ 10 वर्षों में 25-50% तक घट जाएगा।
- कीवीफ्रूट पर कोटा आधारित ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे आयात बढ़ने पर कीमतें घंट जाएंगी।
निर्यातकों को बड़ा बूस्ट
भारत के सभी निर्यातों पर न्यूजीलैंड में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। टेक्सटाइल, गारमेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं को विशेष लाभ होगा। न्यूजीलैंड के 95% निर्यातों पर टैरिफ कम या जीरो होगा, जिससे दोनों तरफ व्यापार तेजी से बढ़ेगा।
लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 बिलियन डॉलर पहुंचाना।
रोजगार और वीजा का तोहफा
न्यूजीलैंड भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए हर साल 5,000 टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट वीजा देगा (IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन आदि क्षेत्रों में)। इसके अलावा 1,000 वर्क एंड हॉलिडे वीजा भी उपलब्ध होंगे। यह भारतीय युवाओं के लिए न्यूजीलैंड में काम के नए अवसर खोलेगा।
निवेश प्रतिबद्धता
न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगा। फोकस एरिया: मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विसेज, इनोवेशन और जॉब क्रिएशन।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
भारत ने डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोई छूट नहीं दी है, ताकि स्थानीय किसानों और उद्योग की रक्षा हो सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस समझौते का स्वागत किया। पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा।