सेबी की बड़ी कार्रवाई: राजेश एक्सपोर्ट्स 5% टूटा, प्रमोटर राजेश मेहता पर बैन, 99% रेवेन्यू फर्जी शक

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₹15 लाख करोड़ का फर्जी कारोबार! LIC का भारी निवेश भी सवालों के घेरे में; कंपनी ने कहा – सिर्फ कन्फ्यूजन, हम सहयोग कर रहे हैं

सेबी ने सोने की बड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता पर बड़ी कार्रवाई की है। सेबी के अंतरिम आदेश में राजेश मेहता को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है। कंपनी के शेयरों में आज 5% तक की गिरावट दर्ज की गई और कुछ समय के लिए लोअर सर्किट भी लगा।

सेबी का आरोप

सेबी की जांच में पाया गया कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने FY21 से FY25 के बीच लगभग ₹15.15 लाख करोड़ का रेवेन्यू फर्जी या गलत तरीके से दिखाया। जांच के अनुसार, कंपनी के कुल रेवेन्यू का 97% से 99% हिस्सा संदिग्ध है।

सेबी का कहना है कि यह FEMA नियमों का उल्लंघन है और कंपनी ने गलत वित्तीय आंकड़े पेश किए। प्रमोटर राजेश मेहता पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया

खबर सामने आते ही राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी बिकवाली आई। शेयर 5% तक गिरे और लोअर सर्किट लगने की स्थिति बनी। निवेशकों में घबराहट देखी गई।

कंपनी का पक्ष

कंपनी ने सेबी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह “सिर्फ कन्फ्यूजन” है। राजेश एक्सपोर्ट्स ने बयान में कहा कि वह सेबी के साथ पूरा सहयोग कर रही है और जल्द ही सभी दस्तावेज सौंपे जाएंगे। कंपनी का दावा है कि उसके कारोबार में कोई गड़बड़ी नहीं है।

LIC का निवेश भी सवालों के घेरे में

इस मामले में सबसे बड़ी हैरानी LIC के भारी निवेश को लेकर है। LIC ने राजेश एक्सपोर्ट्स में काफी पैसा लगाया था, जबकि ज्यादातर म्यूचुअल फंड्स और अन्य संस्थागत निवेशक इससे दूर रहे। अब सवाल उठ रहे हैं कि LIC ने इतना बड़ा निवेश क्यों किया जब कंपनी के आंकड़े संदिग्ध थे।

जांच का दायरा

सेबी की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि:

  • कंपनी ने विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन किया या नहीं
  • रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर क्यों दिखाया गया
  • क्या प्रमोटर ने व्यक्तिगत लाभ के लिए गलत आंकड़े पेश किए

बाजार पर असर

इस खबर से सोने और ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों पर भी असर पड़ा। निवेशक अब उन कंपनियों पर ज्यादा नजर रख रहे हैं जिनके रेवेन्यू और एक्सपोर्ट आंकड़ों में असंगति दिख रही है।

आगे क्या?

सेबी की जांच अभी जारी है। कंपनी को सेबी के सामने अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। अगर आरोप सही पाए गए तो कंपनी और प्रमोटर पर भारी जुर्माना और अन्य कार्रवाई हो सकती है।

निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे ऐसी कंपनियों से सावधानी बरतें जिनके वित्तीय आंकड़ों में असंगति दिखे।

नोट: यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। कंपनी पर कोई अंतिम आरोप साबित नहीं हुआ है।

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