फिच ने भारत की GDP ग्रोथ घटाकर 6.4% की: अमेरिका-ईरान जंग से थमेगी रफ्तार, महंगाई 5.3% तक पहुंचने का खतरा

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ऊर्जा की कीमतें और कमजोर मानसून से चिंता; RBI दरें बढ़ा सकता है, घरेलू मांग पर दबाव

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को घटा दिया है। फिच ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ऊर्जा की कीमतों में तेजी से अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

महंगाई का अनुमान भी बढ़ा

फिच ने मुद्रास्फीति (Inflation) के अनुमान को भी बढ़ा दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक महंगाई 5.3% तक पहुंच सकती है। मुख्य कारण:

  • ऊर्जा की ऊंची कीमतें
  • आधार प्रभाव (Base Effect)
  • कमजोर मानसून और गर्मी की लहर से खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा

अमेरिका-ईरान जंग का असर

फिच ने कहा कि मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है। इससे:

  • भारत का आयात बिल बढ़ेगा
  • मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ेगा
  • घरेलू मांग प्रभावित हो सकती है

एजेंसी ने यह भी कहा कि नेट एक्सटर्नल डिमांड से विकास को कुछ सपोर्ट मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर रफ्तार धीमी रहेगी।

RBI पर असर

फिच का मानना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए RBI बाद में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। हालांकि, फिलहाल RBI ने दरें स्थिर रखी हैं। अगर महंगाई और बढ़ी तो दरों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ सकता है।

सरकार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

सरकार ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है और घरेलू मांग अभी भी अच्छी है। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • अगर मानसून अच्छा रहा तो स्थिति सुधर सकती है
  • तेल की कीमतें स्थिर रहें तो दबाव कम होगा
  • सरकार को खर्च बढ़ाने और सुधार जारी रखने की जरूरत है

बाजार पर असर

इस खबर के बाद शेयर बाजार में हल्का दबाव देखा गया। विश्लेषकों का कहना है कि फिच का यह अनुमान बाजार के लिए नकारात्मक है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की लंबी अवधि की संभावनाएं अभी भी मजबूत हैं।

आगे क्या?

फिच की अगली समीक्षा में स्थिति पर नजर रखी जाएगी। अगर वैश्विक तनाव बढ़ा या मानसून कमजोर रहा तो आगे और कटौती हो सकती है। वहीं, अगर स्थिति सुधरी तो अनुमान फिर से ऊपर जा सकते हैं।

नोट: यह अनुमान फिच के जून 2026 ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक पर आधारित है।

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