महंगाई लगातार पांचवें महीने चढ़ी: मई में 3.93% पर पहुंची, खाने-पीने और यात्रा महंगी
खाद्य मुद्रास्फीति और ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने से आम आदमी पर बोझ; RBI पर दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ा
देश में महंगाई दर लगातार पांचवें महीने बढ़ रही है। मई 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.65% थी। खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्टेशन की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण है।
मई में महंगाई के आंकड़े
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य मुद्रास्फीति भी बढ़ी है। सब्जियां, दालें, दूध और अनाज महंगे हुए हैं। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण ट्रांसपोर्टेशन महंगा पड़ा, जिसका असर समग्र महंगाई पर पड़ा।
लगातार पांचवें महीने बढ़ोतरी
अप्रैल में महंगाई 3.65% थी, मार्च में 3.48% और फरवरी में 3.12% थी। इस तरह मई में लगातार पांचवें महीने महंगाई दर ऊपर चढ़ी है। हालांकि यह अभी भी RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे है, लेकिन बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बनी हुई है।
आम आदमी पर असर
महंगाई बढ़ने से आम परिवारों पर सीधा असर पड़ रहा है। खाने-पीने की चीजों के महंगे होने से बजट पर दबाव बढ़ा है। साथ ही बस, ट्रेन और टैक्सी जैसी यात्रा महंगी होने से दैनिक खर्च बढ़ गया है। निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
RBI पर दबाव
बढ़ती महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि जून की नीति समीक्षा में RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था, लेकिन अगर महंगाई और बढ़ी तो अगली बैठकों में सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि महंगाई अभी भी नियंत्रण में है और मानसून अच्छा रहने पर खाद्य कीमतें स्थिर रह सकती हैं। सरकार आपूर्ति श्रृंखला सुधारने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक तेल की कीमतें और कमजोर रुपया भी महंगाई को प्रभावित कर रहे हैं। अगर मानसून कमजोर रहा या वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ीं तो महंगाई और ऊपर जा सकती है।
आगे क्या?
अगले महीने के आंकड़ों पर सबकी नजर होगी। अगर महंगाई 4% के करीब पहुंची तो RBI को अपनी नीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। आम लोगों को उम्मीद है कि सरकार और RBI मिलकर महंगाई को नियंत्रित रखेंगे।
नोट: महंगाई के आंकड़े केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा जारी किए जाते हैं।