खरीफ बुवाई में 6% की गिरावट: मानसून की देरी और अनियमित बारिश से किसानों की चिंता बढ़ी

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धान, दलहन और तिलहन की बुवाई प्रभावित, खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका; सरकार ने राहत पैकेज का ऐलान किया

खरीफ सीजन में बुवाई का काम इस साल सामान्य से 6% कम रहा है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देशभर में खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल की तुलना में काफी कम हुई है। मानसून की देरी और कुछ क्षेत्रों में अनियमित बारिश के कारण किसानों को बुवाई में कठिनाई हो रही है।

बुवाई के आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक खरीफ फसलों की बुवाई 6% कम हुई है। सबसे ज्यादा असर धान, दलहन और तिलहन की फसलों पर पड़ा है। कुछ राज्यों में तो बुवाई में 8-10% तक की गिरावट दर्ज की गई है।

मुख्य कारण

खरीफ बुवाई में गिरावट के पीछे कई कारण हैं:

  • मानसून की देरी: कई क्षेत्रों में मानसून सामान्य से 10-15 दिन देर से पहुंचा।
  • अनियमित बारिश: कुछ जगहों पर भारी बारिश हुई तो कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनी रही।
  • उच्च तापमान: जून-जुलाई में बढ़े तापमान ने मिट्टी की नमी को प्रभावित किया।
  • बीज और उर्वरक की कमी: कुछ क्षेत्रों में किसानों को सही समय पर बीज और उर्वरक नहीं मिल पाए।

प्रभावित फसलें

  • धान: सबसे ज्यादा असर धान की बुवाई पर पड़ा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में बुवाई धीमी रही।
  • दलहन: अरहर, उड़द और मूंग की बुवाई में भी कमी आई।
  • तिलहन: सोयाबीन और तिल की बुवाई प्रभावित हुई।
  • कपास: मध्य प्रदेश और गुजरात में कपास की बुवाई में भी गिरावट देखी गई।

किसानों की चिंता

किसान संगठनों ने सरकार से तुरंत राहत की मांग की है। कई किसानों का कहना है कि अगर अगले 10-15 दिनों में बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। इससे उनकी आय प्रभावित होगी और कर्ज का बोझ बढ़ेगा।

खाद्य महंगाई पर असर

खरीफ बुवाई में गिरावट से खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अगर उत्पादन कम हुआ तो दाल, चावल और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। यह आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालेगा।

सरकार का रुख

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने स्थिति पर नजर रखने का ऐलान किया है। मंत्रालय ने कहा कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ बुवाई में सुधार होने की उम्मीद है। सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज की भी घोषणा की है, जिसमें बीज सब्सिडी और मुआवजे का प्रावधान शामिल है।

भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव

इस खबर से कृषि से जुड़े कई शेयर प्रभावित हो सकते हैं। मुख्य रूप से प्रभावित होने वाली कंपनियां:

  • महिंद्रा एंड महिंद्रा और एस्कॉर्ट्स कुबोटा: ट्रैक्टर मांग में कमी से दबाव
  • कोरोमंडल इंटरनेशनल और चंबल फर्टिलाइजर्स: उर्वरक बिक्री प्रभावित हो सकती है
  • यूपीएल और रैलिस इंडिया: कीटनाशक और कृषि रसायन क्षेत्र पर असर
  • आईटीसी और अन्य एग्री-इनपुट कंपनियां: कच्चे माल और मांग में उतार-चढ़ाव

ट्रैक्टर और उर्वरक कंपनियों के शेयरों में आज नकारात्मक रुख देखा जा सकता है।

विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भी स्थिति को सुधारा जा सकता है। अगर अगले दो हफ्तों में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई में कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। हालांकि, लंबे समय तक सूखा पड़ा तो उत्पादन पर असर जरूर पड़ेगा।

आगे क्या?

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है। किसान अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं। सरकार भी स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत देने के लिए तैयार है।

खरीफ सीजन भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस साल की बुवाई में आई गिरावट चिंता का विषय है, लेकिन सही कदमों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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