गूगल ने 100 से अधिक कर्मचारियों को निकाला: एआई फोकस के कारण क्लाउड डिजाइन टीमों में कटौती, पिछले महीने 200 एआई कॉन्ट्रैक्टर्स की छंटनी

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टेक दिग्गज की लागत-कटौती रणनीति से प्रभावित हुए यूजर एक्सपीरियंस रिसर्चर, अमेरिका-केंद्रित छंटनी ने बढ़ाई चिंताएं

नई दिल्ली: अमेरिकी टेक दिग्गज गूगल ने एक बार फिर अपनी कर्मचारी संख्या में कटौती की है। कंपनी ने अपने क्लाउड डिवीजन में डिजाइन और यूजर एक्सपीरियंस (यूएक्स) से जुड़े 100 से अधिक पदों पर छंटनी की घोषणा की है। यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर फोकस बढ़ाने और लागत नियंत्रण के उद्देश्य से उठाया गया है। सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह छंटनी इस सप्ताह हुई, जिसमें “क्वांटिटेटिव यूजर एक्सपीरियंस रिसर्च” और “प्लेटफॉर्म एंड सर्विस एक्सपीरियंस” टीमों को निशाना बनाया गया। ये टीमें यूजर व्यवहार को समझने के लिए डेटा, सर्वे और अन्य टूल्स का उपयोग करती थीं, जो प्रोडक्ट डिजाइन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।

छंटनी का कारण: एआई पर निवेश बढ़ाने की होड़

गूगल की यह छंटनी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। कंपनी के सीईओ सुंदर पिचाई के नेतृत्व में गूगल मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसे प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहने के लिए एआई पर भारी निवेश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिजाइन टीमों में कटौती से बचाई गई फंडिंग को एआई प्रोजेक्ट्स जैसे जेमिनी और एआई ओवरव्यूज में डाला जाएगा। कुछ क्लाउड डिजाइन टीमों में 50% तक स्टाफ कम हो गया है। अधिकांश प्रभावित कर्मचारी अमेरिका में आधारित हैं, और कई को दिसंबर तक कंपनी के अंदर नई भूमिका ढूंढने का समय दिया गया है।

एक प्रभावित कर्मचारी, जो ओ-1 वीजा पर काम कर रहे थे, ने बताया कि उनके पास अब केवल 60 दिन हैं नई नौकरी ढूंढने के लिए, वरना अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कई पूर्व कर्मचारियों ने अपनी निराशा जाहिर की, इसे “विश्वासघात” करार देते हुए। गूगल ने आधिकारिक बयान में कहा कि ये बदलाव प्रोडक्ट क्वालिटी को प्रभावित नहीं करेंगे, क्योंकि एआई टूल्स अब प्रारंभिक डिजाइन इटरेशंस को तेजी से संभाल सकते हैं।

पिछले छंटनियां: 2025 में लगातार कटौती का सिलसिला

यह छंटनी 2025 में गूगल की तीसरी या चौथी बड़ी कार्रवाई है। सितंबर में कंपनी ने जेमिनी और एआई ओवरव्यूज जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले 200 से अधिक एआई कॉन्ट्रैक्टर्स को निकाल दिया था। वायर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, ये कॉन्ट्रैक्टर्स ग्लोबल लॉजिक जैसी फर्मों के माध्यम से काम कर रहे थे, और छंटनी के पीछे वेतन व कामकाजी स्थितियों पर विवाद भी था। कुछ कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने कम वेतन और नौकरी की असुरक्षा पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्हें निशाना बनाया गया।

इससे पहले, अप्रैल में एंड्रॉयड, पिक्सल और क्रोम ब्राउजर से जुड़े प्लेटफॉर्म्स एंड डिवाइसेस यूनिट में सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी हुई थी। फरवरी फाइलिंग के अनुसार, दिसंबर 2024 तक गूगल के पास 1,83,323 कर्मचारी थे। 2023 में शुरू हुए बड़े पैमाने की छंटनी (12,000 नौकरियां) के बाद से कंपनी लगातार ह्यूमन रिसोर्सेज, हार्डवेयर, सर्च, एड्स, मार्केटिंग, फाइनेंस और कॉमर्स जैसे विभागों में वॉलंटरी एग्जिट पैकेज ऑफर कर रही है। मैनेजमेंट लेयर्स को भी एक-तिहाई तक कम किया गया है।

टेक इंडस्ट्री पर असर: वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी

गूगल की यह कार्रवाई टेक सेक्टर में व्यापक ट्रेंड को दर्शाती है। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और एप्पल जैसी कंपनियां भी एआई पर फोकस के नाम पर छंटनी कर रही हैं। सितंबर में माइक्रोसॉफ्ट ने एक्सबॉक्स यूनिट में 650 नौकरियां काटीं, जबकि अमेजन ने कम्युनिकेशंस टीम में कटौती की। एआई की होड़ में कंपनियां कुशलता बढ़ाने के लिए स्टाफ कम कर रही हैं, लेकिन आलोचक चेतावनी दे रहे हैं कि इससे यूजर-सेंट्रिक इनोवेशन प्रभावित हो सकता है।

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि गूगल जैसे दिग्गजों की नीतियां वैश्विक स्तर पर असर डालती हैं। एक्सेंचर जैसी कंपनियों में भी जबरन इस्तीफों की खबरें आ रही हैं।

निष्कर्ष

गूगल की नवीनतम छंटनी एआई-केंद्रित भविष्य की ओर एक कदम है, लेकिन यह कर्मचारियों के लिए कष्टदायक साबित हो रही है। कंपनी का कहना है कि ये बदलाव लंबे समय में ग्रोथ सुनिश्चित करेंगे, लेकिन प्रभावित परिवारों की परेशानियां कम नहीं हो रही। टेक इंडस्ट्री में नौकरी की तलाश अब और चुनौतीपूर्ण हो गई है। गूगल जैसे दिग्गजों को अब न केवल तकनीकी नवाचार पर, बल्कि कर्मचारी कल्याण पर भी ध्यान देना होगा।

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