टॉप कंपनियों की वैल्यू में भारी गिरावट: रिलायंस सबसे बड़ा लूजर, ₹1.25 लाख करोड़ डूबे

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मार्केट कैप में ₹39,718 करोड़ की कमी, TCS और एयरटेल भी प्रभावित; FPI बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता से दबाव

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ सत्रों से जारी दबाव का असर टॉप कंपनियों पर साफ दिख रहा है। NSE के टॉप-10 कंपनियों में से 7 की मार्केट वैल्यू में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर इन कंपनियों के मार्केट कैप में ₹1.25 लाख करोड़ से ज्यादा की कमी आई है।

रिलायंस सबसे बड़ा लूजर

रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे ज्यादा प्रभावित रही। कंपनी के मार्केट कैप में अकेले ₹39,718 करोड़ की गिरावट आई। रिलायंस के शेयरों पर लगातार बिकवाली का दबाव रहा, जिससे कंपनी की वैल्यू में सबसे ज्यादा कमी देखी गई।

अन्य कंपनियों पर असर

टॉप-10 में शामिल अन्य कंपनियों में भी गिरावट दर्ज की गई:

  • TCS का मार्केट कैप घटा
  • एयरटेल की वैल्यू में भी कमी आई
  • कुल 7 कंपनियों के मार्केट कैप में मिलाकर ₹1.25 लाख करोड़ की गिरावट

केवल कुछ कंपनियां ही इस गिरावट से बच पाईं।

गिरावट के मुख्य कारण

विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं:

  • FPI की लगातार बिकवाली — विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं।
  • कमजोर रुपया — रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर बना हुआ है।
  • उच्च तेल की कीमतें — मध्य पूर्व के तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
  • वैश्विक अनिश्चितता — अमेरिका और अन्य बाजारों में भी अस्थिरता का माहौल है।

बाजार की स्थिति

Nifty और Sensex दोनों ही दबाव में चल रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। टॉप कंपनियों की वैल्यू में गिरावट से निवेशकों का भरोसा थोड़ा डगमगा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से FPI आउटफ्लो और वैश्विक जोखिम के कारण है। भारतीय कंपनियों के फंडामेंटल अभी भी मजबूत हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में दबाव बना रह सकता है।

कुछ विश्लेषक मानते हैं कि अगर FPI की बिकवाली रुकी और तेल की कीमतें स्थिर हुईं, तो बाजार जल्दी रिकवर कर सकता है।

आगे क्या?

निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करें और शॉर्ट टर्म की अस्थिरता से घबराएं नहीं। टॉप कंपनियों की वैल्यू में आई यह गिरावट खरीदारी का अवसर भी बन सकती है, बशर्ते कंपनी के बुनियादी ढांचे मजबूत हों।

नोट: मार्केट कैप में बदलाव बाजार की दैनिक गतिविधियों पर निर्भर करता है।

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