9 महीनों में सोने की कीमत 49% उछली, चांदी 60% चमकी: ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है सोना, जानें तेजी के 5 प्रमुख कारण

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वैश्विक अनिश्चितता और सेंट्रल बैंक खरीदारी ने किया कमाल, निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर लेकिन जोखिम भी

भोपाल: 2025 के पहले नौ महीनों में सोना और चांदी ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। सोने की कीमत में 49% की तेज उछाल आया है, जबकि चांदी 60% चमक गई। वर्तमान में सोना प्रति 10 ग्राम ₹1,10,000 से ऊपर कारोबार कर रहा है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह ₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों ने इस तेजी को हवा दी है। लेकिन क्या यह उछाल लंबा चलेगा? आइए जानते हैं सोने में इस रिकॉर्ड ब्रेक प्रदर्शन के पीछे के 5 प्रमुख कारण।

पिछले 9 महीनों का परफॉर्मेंस

जनवरी 2025 में सोना प्रति 10 ग्राम ₹74,000 के आसपास था, जो अब ₹1,10,000 से अधिक हो गया है यानी लगभग 49% की वृद्धि। इसी तरह, चांदी प्रति किलोग्राम ₹80,000 से बढ़कर ₹1,43,000 पर पहुंची, जो 60% की छलांग दर्शाती है। यह तेजी वैश्विक स्तर पर भी दिखी, जहां सोना $3,700 प्रति औंस के पार चढ़ गया। भारत में त्योहारी मौसम और विवाह सीजन की मांग ने घरेलू बाजार को और गर्म कर दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह उछाल महज अस्थायी नहीं है। गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन जैसे विश्लेषकों ने 2025 के अंत तक सोने को $3,700-$4,000 प्रति औंस (भारतीय बाजार में ₹1.25 लाख-₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम) तक पहुंचने का पूर्वानुमान लगाया है। सिटिग्रुप का अनुमान भी ₹1.20 लाख का है, जबकि गोल्डमैन सैक्स 37% और वृद्धि की संभावना बता रहा है।

सोने में तेजी के 5 प्रमुख कारण

सोने की इस रॉकेट जैसी उड़ान के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक हैं। यहां हैं पांच मुख्य कारण:

  1. जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और युद्धों का डर: यूक्रेन-रूस युद्ध, मध्य पूर्व में इजरायल-हमास संघर्ष और अमेरिका-चीन तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर धकेल दिया। सोना सदियों से ‘सेफ हैवन’ एसेट माना जाता है, और 2025 में ये जोखिम बढ़ने से इसकी मांग 30% तक उछली।
  2. सेंट्रल बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी: चीन, भारत, तुर्की और पोलैंड जैसे देशों के सेंट्रल बैंक सोने के बड़े खरीदार बने हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2025 में सेंट्रल बैंक 710 टन सोना खरीद चुके हैं यह पिछले वर्ष से 20% अधिक है। अमेरिकी डॉलर पर संदेह और रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन ने इस मांग को बढ़ाया।
  3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती: फेड की 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की उम्मीद ने सोने को आकर्षक बनाया। कम ब्याज दरें बॉन्ड्स और अन्य फिक्स्ड इनकम एसेट्स को कम रिटर्न देती हैं, जबकि सोना बिना ब्याज के भी मूल्य संरक्षक का काम करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फेड की स्वतंत्रता पर सवाल उठने से सोना $5,000 तक जा सकता है।
  4. मुद्रास्फीति का भय और डॉलर की कमजोरी: वैश्विक मुद्रास्फीति 2-3% पर बनी हुई है, जो सोने को हेज के रूप में लोकप्रिय बनाती है। ट्रंप प्रशासन के टैरिफ नीतियों से डॉलर 11% कमजोर हुआ, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए सोना सस्ता हो गया। भारत में रुपये की गिरावट ने भी आयातित सोने को महंगा किया।
  5. ट्रंप की टैरिफ नीतियां और ट्रेड वॉर: ट्रंप के ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ ने वैश्विक व्यापार को अनिश्चितता में डाल दिया। अप्रैल 2025 में इनकी घोषणा के बाद सोने में 30% की तेजी आई। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नीतियां मुद्रास्फीति बढ़ाएंगी, जो सोने के लिए सकारात्मक है।

निवेशकों के लिए सलाह

यह तेजी निवेशकों के लिए अवसर तो लाई है, लेकिन जोखिम भी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने में 10-15% पोर्टफोलियो रखें, लेकिन डाइवर्सिफाई करें। एसआईपी के जरिए गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स में निवेश करें। हालांकि, यदि फेड की कटौती में देरी हुई या जियोपॉलिटिकल तनाव कम हुए, तो सुधार संभव है।

कन्क्लुजन

सोने और चांदी की यह चमक वैश्विक अर्थव्यवस्था की उथल-पुथल को दर्शाती है। ₹1.55 लाख का लक्ष्य हासिल करने के लिए ये कारक मजबूत बने रहें, तो निवेशक मुनाफे की फसल काट सकते हैं। लेकिन सतर्क रहें—सोना चमकता है, पर बाजार की चमक कभी-कभी धुंधली भी हो जाती है।

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