भारत ने तांबे पर 50% शुल्क को लेकर अमेरिका के साथ डब्ल्यूटीओ के तहत परामर्श की मांग की
व्यापार तनाव बढ़ा, तांबे निर्यात पर असर की आशंका
नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार, 2 सितंबर 2025 को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत अमेरिका के साथ परामर्श की मांग की है, जिसमें अमेरिका द्वारा तांबे के उत्पादों पर 50% शुल्क लगाने का मुद्दा उठाया गया है। यह कदम अमेरिका द्वारा 1 अगस्त 2025 से लागू की गई इस शुल्क नीति के जवाब में उठाया गया है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लागू किया गया है। भारत का दावा है कि यह शुल्क वास्तव में एक सुरक्षा उपाय (सेफगार्ड) है, जिसकी डब्ल्यूटीओ को सूचना नहीं दी गई, जो नियमों का उल्लंघन है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत ने इस शुल्क से प्रभावित अपने 360 मिलियन डॉलर के तांबे निर्यात को लेकर चिंता जताई है, जो अमेरिका को निर्यात किया जाता है। हालांकि, भारत तांबे का शुद्ध आयातक है, और 2024-25 में इसकी आयात राशि 14.45 बिलियन डॉलर रही, जो निर्यात से कहीं अधिक है। अमेरिका से तांबे का स्क्रैप भी आयात होता है, जिसकी कीमत 288 मिलियन डॉलर है, लेकिन बढ़े शुल्क से यह सौदा प्रभावित हो सकता है।
यह विवाद तब सामने आया है जब भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन 25 अगस्त से निर्धारित छठे दौर की वार्ता टल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुल्क भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर जब अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका अप्रैल-जुलाई 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 12.56 बिलियन डॉलर रहा।
कुछ विश्लेषकों ने सुझाव दिया कि अमेरिका का यह कदम व्यापार संरक्षणवाद का हिस्सा हो सकता है, जो वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ है। दूसरी ओर, भारत ने पहले भी इस तरह के विवादों में सलाह मांगी थी, जैसे इस्पात और एल्यूमीनियम पर शुल्क पर। यह देखना बाकी है कि डब्ल्यूटीओ परामर्श से इस तनाव का समाधान होगा या नहीं।