जून में महंगाई लगातार छठे महीने बढ़ी, 4.38% पर पहुंची; RBI का मिड टारगेट टूटा

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खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने बढ़ाई चिंता, RBI की मौद्रिक नीति पर दबाव; आर्थिक विकास और आम आदमी की जेब पर असर

भारत में जून महीने में महंगाई दर लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मध्यावधि लक्ष्य (4%) से ऊपर निकल गया है, जिससे केंद्रीय बैंक की चिंता बढ़ गई है। खाद्य वस्तुओं की महंगाई में आई तेजी ने पूरे महंगाई आंकड़े को प्रभावित किया है।

महंगाई के आंकड़े

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून में खुदरा महंगाई दर 4.38% रही, जो मई के 4.15% से ज्यादा है। खाद्य महंगाई दर में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया। सब्जियां, दालें, अनाज और मसालों की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ाया है।

महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, महंगाई बढ़ने के पीछे कई कारण हैं:

  • खाद्य वस्तुओं की कमी: मानसून में देरी और कुछ इलाकों में भारी बारिश से सब्जी और अनाज उत्पादन प्रभावित हुआ।
  • तेल की महंगाई: मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
  • रुपए की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने आयात महंगा कर दिया।
  • आपूर्ति श्रृंखला में दिक्कतें: परिवहन और लॉजिस्टिक्स की समस्या ने कीमतों को और बढ़ाया।

RBI पर दबाव

RBI का मध्यावधि महंगाई लक्ष्य 4% है। जून का आंकड़ा इस लक्ष्य से ऊपर निकल गया है, जिससे RBI की मौद्रिक नीति पर दबाव बढ़ गया है। RBI गवर्नर ने पहले ही कहा था कि महंगाई को 4% के करीब रखना प्राथमिकता है। अब RBI को ब्याज दरों पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।

अर्थव्यवस्था पर असर

महंगाई बढ़ने से आम आदमी की खर्च करने की क्षमता कम हो रही है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। इससे उपभोग मांग प्रभावित हो सकती है, जो आर्थिक विकास के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

सरकारी कदम

सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। सब्जी और अनाज की आपूर्ति बढ़ाने, आयात शुल्क कम करने और बफर स्टॉक से बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह महंगाई अस्थायी हो सकती है, लेकिन अगर खाद्य महंगाई पर काबू नहीं पाया गया तो यह लंबे समय तक बनी रह सकती है। RBI को अब सतर्क रहना होगा।

आगे क्या?

RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक में महंगाई के इस आंकड़े पर गौर किया जाएगा। सरकार और RBI दोनों को मिलकर महंगाई को नियंत्रित करने की रणनीति बनानी होगी।

यह आंकड़ा आम आदमी के लिए चिंता का विषय है, लेकिन सही कदमों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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