म्यूचुअल फंड बने शेयर बाजार का पसंदीदा रास्ता, डायरेक्ट होल्डिंग्स का हिस्सा घटा

0

FY26 में कंपनियों में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 11.3% पहुंची; प्रत्यक्ष शेयरधारिता 9.4% पर सिमटी, एसआईपी और फोलियो में जोरदार बढ़ोतरी

भारतीय निवेशक शेयर बाजार में निवेश के लिए अब सीधे शेयर खरीदने के बजाय म्यूचुअल फंड का रास्ता ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2026 के आंकड़े बताते हैं कि कंपनियों में म्यूचुअल फंडों की हिस्सेदारी बढ़कर 11.3 प्रतिशत हो गई है, जबकि आम निवेशकों की प्रत्यक्ष शेयरधारिता घटकर 9.4 प्रतिशत रह गई है। यह रुझान दर्शाता है कि रिटेल निवेशक प्रोफेशनल मैनेजमेंट वाले उत्पादों की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।

म्यूचुअल फंड की बढ़ती ताकत

वित्त वर्ष 2025 में कंपनियों में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 10.2 प्रतिशत थी, जो एक साल में बढ़कर 11.3 प्रतिशत पहुंच गई। दीर्घकालिक नजरिए से देखें तो यह बढ़ोतरी और भी प्रभावशाली है। वित्त वर्ष 2014 में यह हिस्सेदारी महज 3.4 प्रतिशत थी। यानी एक दशक में म्यूचुअल फंडों की भूमिका लगभग तीन गुना से ज्यादा हो गई है।

इसके विपरीत, पब्लिक की प्रत्यक्ष शेयर होल्डिंग वित्त वर्ष 2025 के 9.9 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 9.4 प्रतिशत रह गई। यह साफ संकेत है कि नए निवेशक और मौजूदा निवेशक दोनों ही सीधे शेयर रखने के बजाय म्यूचुअल फंड के जरिए बाजार में एक्सपोजर लेना पसंद कर रहे हैं।

फोलियो और एसआईपी में तेजी

म्यूचुअल फंड उद्योग में खातों (फोलियो) की संख्या वित्त वर्ष 2026 में 16.8 प्रतिशत बढ़कर 27.4 करोड़ हो गई। सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए होने वाले सालाना निवेश में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025 में जहां एसआईपी योगदान 2.9 लाख करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 3.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

एसआईपी की लोकप्रियता छोटे निवेशकों के लिए अनुशासित निवेश का सबसे आसान तरीका बन गई है। नियमित छोटी रकम लगाकर लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएट करने का यह तरीका युवाओं और मिडिल-क्लास परिवारों में खासतौर पर पसंद किया जा रहा है।

डायरेक्ट डेमेट खातों का रुझान

सीधे शेयर रखने वाले निवेशकों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन रफ्तार धीमी पड़ी है। रेजिडेंट इंडिविजुअल डेमेट खातों की संख्या वित्त वर्ष 2026 में 17.6 प्रतिशत बढ़कर 22.5 करोड़ हो गई। इससे पिछले साल यह वृद्धि 26.7 प्रतिशत थी। यानी डेमेट खाते खुलने का सिलसिला जारी है, लेकिन उत्साह कुछ कम हुआ है।

30 साल से कम उम्र के निवेशकों का हिस्सा डेमेट खातों में 38.4 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल के 39.5 प्रतिशत से थोड़ा कम है। कुल मिलाकर भारत की आबादी में डेमेट पेनिट्रेशन अभी भी 13.1 प्रतिशत ही है, जबकि चीन में यह 28.3 प्रतिशत और जापान में 30.2 प्रतिशत है।

अर्थव्यवस्था में म्यूचुअल फंड का योगदान

वित्त वर्ष 2026 में म्यूचुअल फंड एसेट्स देश के जीडीपी का 19.6 प्रतिशत हो गए। यह आंकड़ा विकसित बाजारों की तुलना में अभी भी काफी कम है। चीन में यह 28.7 प्रतिशत, जापान में 43 प्रतिशत, ब्रिटेन में 54.3 प्रतिशत और अमेरिका में 76.8 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि भारत में म्यूचुअल फंड उद्योग के पास अभी काफी विस्तार की गुंजाइश बाकी है।

एचएनआई सेगमेंट भी मजबूत

हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (एचएनआई) के लिए डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) का आकार भी बढ़ा है। वित्त वर्ष 2026 में पीएमएस एसेट्स 35.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए, जो पिछले साल 31.8 लाख करोड़ रुपये थे। निवेशकों की संख्या में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और प्रति निवेशक औसत निवेश बढ़कर 16.88 करोड़ रुपये हो गया।

क्यों बढ़ रहा है म्यूचुअल फंड का आकर्षण?

विशेषज्ञों का मानना है कि कई कारण इस बदलाव के पीछे हैं। पहला, डायरेक्ट इक्विटी में रिसर्च, समय और रिस्क मैनेजमेंट की जरूरत ज्यादा होती है। म्यूचुअल फंड में प्रोफेशनल फंड मैनेजर यह जिम्मेदारी संभालते हैं। दूसरा, एसआईपी के जरिए बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है। तीसरा, टैक्स दक्षता और विविधीकरण की सुविधा म्यूचुअल फंड को आकर्षक बनाती है।

इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एप्स ने म्यूचुअल फंड निवेश को बेहद आसान बना दिया है। केवाईसी से लेकर एसआईपी सेटअप तक सब कुछ मोबाइल पर हो जाता है, जिससे नए निवेशकों का आना आसान हुआ है।

आगे की राह

रिटेल निवेशकों का म्यूचुअल फंड की ओर झुकाव जारी रहने की उम्मीद है। अगर बाजार में स्थिरता बनी रहती है और एसआईपी कल्चर और मजबूत होता है तो आने वाले वर्षों में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। साथ ही, डायरेक्ट इक्विटी में भी जागरूक निवेशकों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन कुल मिलाकर मैनेज्ड प्रोडक्ट्स का दबदबा बना रहेगा।

निष्कर्ष

भारतीय इक्विटी बाजार में म्यूचुअल फंड अब सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभर रहे हैं। प्रत्यक्ष शेयरधारिता का हिस्सा घट रहा है, जबकि म्यूचुअल फंड की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। यह रुझान न सिर्फ निवेशकों की परिपक्वता को दर्शाता है बल्कि पूंजी बाजार के स्वस्थ विकास का भी संकेत है। एसआईपी और डिजिटल पहुंच के सहारे यह सफर आगे और तेज होने वाला है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.