राजस्थान के नोख सोलर प्रोजेक्ट में 167 MW क्षमता का व्यावसायिक संचालन शुरू: एनटीपीसी की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा को नई गति
प्लॉट-1 के पहले चरण में सफल कमीशनिंग, कुल स्थापित क्षमता 60,705 MW पहुंची; भारत के साफ ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान
जैसलमेर: देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित अपने नोख सोलर पीवी प्रोजेक्ट के प्लॉट-1 में 167 मेगावाट (MW) क्षमता का व्यावसायिक संचालन शुरू करने की घोषणा की है। यह कमीशनिंग 26 सितंबर, 2025 से प्रभावी होगी, जो एनटीपीसी की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। प्रोजेक्ट के कुल 3×245 MW क्षमता वाले इस हिस्से से एनटीपीसी की स्टैंडअलोन स्थापित और व्यावसायिक क्षमता 60,705 MW हो जाएगी, जबकि समूह स्तर पर यह 83,863 MW तक पहुंच जाएगी।
कमीशनिंग का विवरण और महत्व
एनटीपीसी ने एक नियामक फाइलिंग में कहा, “सफल कमीशनिंग के बाद, नोख सोलर पीवी प्रोजेक्ट (3x245MW), राजस्थान के प्लॉट-1 में 245 एमडब्ल्यू क्षमता के 167 एमडब्ल्यू हिस्से को 26 सितंबर, 2025 से व्यावसायिक संचालन के लिए घोषित किया गया है।” यह प्रोजेक्ट राजस्थान के सौर ऊर्जा समृद्ध क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जहां सूर्य की प्रचुरता का लाभ उठाकर साफ बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
नोख सोलर प्रोजेक्ट एनटीपीसी के ‘ग्रीन एनर्जी’ पोर्टफोलियो का हिस्सा है, जो कंपनी के 2032 तक 60 गीगावाट (जीडब्ल्यू) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की दिशा में एक कदम है। पहले ही, प्रोजेक्ट के अन्य प्लॉट्स में कमीशनिंग हो चुकी है मार्च 2025 में प्लॉट-2 के 245 MW पूर्ण संचालन और जून 2025 में प्लॉट-3 के 245 एमडब्ल्यू क्षमता की पूरी कमीशनिंग। इस नई कमीशनिंग से एनटीपीसी की कुल सौर क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
एनटीपीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह कमीशनिंग न केवल हमारी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि देश के सतत विकास लक्ष्यों को भी बढ़ावा देगी। राजस्थान जैसे राज्यों में सौर ऊर्जा का विस्तार ग्रामीण विद्युतीकरण और आर्थिक विकास को गति देगा।”
एनटीपीसी की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा
एनटीपीसी, जो ऊर्जा मंत्रालय के अधीन महारत्न कंपनी है, ने हाल के वर्षों में कोयला-आधारित उत्पादन से हटकर नवीकरणीय स्रोतों पर जोर दिया है। वर्तमान में कंपनी की कुल क्षमता में नवीकरणीय हिस्सा लगभग 12% है, लेकिन 2025 तक इसे 25% तक ले जाने का लक्ष्य है। नोख प्रोजेक्ट के अलावा, एनटीपीसी गुजरात, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं पर काम कर रही है।
इस कमीशनिंग से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को विश्वसनीय साफ ऊर्जा उपलब्ध होगी, जो राष्ट्रीय ग्रिड को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारत के 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य को गति मिलेगी।
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
यह प्रोजेक्ट स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आपूर्ति श्रृंखला विकास को बढ़ावा देगा। राजस्थान सरकार के सहयोग से विकसित इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास होगा। पर्यावरणीय दृष्टि से, 167 MW क्षमता से प्रतिवर्ष हजारों टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में योगदान देगी।
हालांकि, सौर परियोजनाओं में मौसम निर्भरता और भंडारण चुनौतियां बनी रहती हैं, लेकिन एनटीपीसी बैटरी स्टोरेज सिस्टम के एकीकरण पर काम कर रही है।
सोलर प्रोजेक्ट की इस कमीशनिंग से एनटीपीसी न केवल अपनी वृद्धि को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को सतत ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में आगे ले जाएगी। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ग्रीन एनर्जी अभियान का प्रतीक है।