RBI ने घटाई रेपो रेट 25 bps, अब 5.25%: लोन सस्ते होंगे, 20 लाख के 20 साल लोन पर ₹70,000+ का फायदा
MPC का सर्वसम्मति से फैसला, न्यूट्रल स्टांस बरकरार; OMO ₹1 लाख करोड़ और USD/INR स्वैप से लिक्विडिटी बढ़ेगी, FY26 GDP 7.3% का अनुमान
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी दिसंबर 2025 मॉनेटरी पॉलिसी समिति (MPC) बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.25% कर दिया। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया और तत्काल प्रभावी है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 दिसंबर 2025 को घोषणा की, जिसमें न्यूट्रल स्टांस बरकरार रखा गया। यह 2025 में चौथा रेट कट है, जिससे कुल 125 bps की कटौती हो चुकी है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची, जबकि Q2 GDP ग्रोथ 8.2% रही। इसके अलावा, RBI ने ₹1 लाख करोड़ के OMO खरीद और $5 बिलियन USD/INR स्वैप की घोषणा की, जो बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाएगी।
रेट कट का प्रभाव: लोन EMI में कमी
रेपो रेट में 0.25% की कटौती से होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन सस्ते होंगे। बैंक आमतौर पर 1-2 महीने में अपनी लेंडिंग रेट्स एडजस्ट करते हैं। उदाहरण के तौर पर, ₹20 लाख के 20 साल (240 महीने) के होम लोन पर पुरानी ब्याज दर (मान लें 6.5%) पर EMI ₹14,911 है, जबकि नई दर (6.25%) पर ₹14,619। कुल भुगतान में ₹70,296 (लगभग ₹70 हजार) का फायदा होगा। यह बचत लंबे समय में लाखों रुपये की हो सकती है।
RBI ने FY26 मुद्रास्फीति अनुमान 2.6% (पहले 3.1%) और GDP ग्रोथ 7.3% (पहले 6.8%) का संशोधन किया। Q3 महंगाई 0.6%, Q4 2.9%, Q1 FY27 3.9% और Q2 FY27 4% रहने का अनुमान है। FY26 GDP Q1-Q4 के लिए 6.7-6.8%। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, “यह ‘गोल्डीलॉक्स’ इकोनॉमी का समय है मजबूत ग्रोथ और कम महंगाई।”
लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय
RBI ने लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए:
- ₹1 लाख करोड़ के ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) खरीद।
- 3-वर्षीय USD/INR बाय-सेल स्वैप $5 बिलियन।
ये कदम बैंकिंग सिस्टम में स्थायी लिक्विडिटी सुनिश्चित करेंगे और मॉनेटरी ट्रांसमिशन को आसान बनाएंगे। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी रेट 5.0% और बैंक रेट 5.5% हो गया।
| मुख्य संशोधन | पुराना अनुमान | नया अनुमान |
|---|---|---|
| रेपो रेट | 5.50% | 5.25% |
| FY26 मुद्रास्फीति | 3.1% | 2.6% |
| FY26 GDP ग्रोथ | 6.8% | 7.3% |
| Q3 महंगाई | – | 0.6% |
निष्कर्ष
RBI का रेट कट अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगा, लोन सस्ते होंगे और निवेश-खपत बढ़ेगी। कम महंगाई और मजबूत GDP से ‘गोल्डीलॉक्स’ दौर कायम रहेगा। उपभोक्ताओं को EMI में राहत मिलेगी, जबकि निवेशक बाजार रैली की उम्मीद कर सकते हैं। RBI का न्यूट्रल स्टांस आगे के कट्स की गुंजाइश रखता है।