सैमसंग और SK हाइनिक्स की चिप्स में जबरदस्त तेजी; भारत में FPI बिकवाली और वैल्यूएशन चिंता से दबाव, घरेलू निवेशक संभाल रहे बाजार
दक्षिण कोरिया ने भारतीय शेयर बाजार को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी के चलते साउथ कोरिया का मार्केट कैपिटलाइजेशन $5 ट्रिलियन (लगभग ₹475 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है, जबकि भारत का मार्केट कैप $4.8 ट्रिलियन (लगभग ₹456 लाख करोड़) पर आ गया है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल साउथ कोरिया का इक्विटी मार्केट 86% उछला है, जबकि भारत का मार्केट कैप हाल के दिनों में दबाव में रहा है।
क्यों आगे निकला साउथ कोरिया?
साउथ कोरिया की सफलता का मुख्य कारण AI मेमोरी चिप्स की वैश्विक मांग है।
- सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स जैसी कंपनियां AI बूम से सीधे लाभान्वित हो रही हैं।
- दोनों कंपनियों का मार्केट कैप $1 ट्रिलियन के क्लब में शामिल हो चुका है।
- कोस्पी इंडेक्स इस साल 100% से ज्यादा उछल चुका है।
भारत क्यों पीछे छूटा?
भारत का मार्केट कैप हाल के हफ्तों में करीब $335 बिलियन (लगभग ₹28 लाख करोड़) कम हुआ है। मुख्य कारण:
- FPI की लगातार बिकवाली — मई में ₹32,963 करोड़ और 2026 में अब तक ₹2.25 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी।
- कमजोर रुपया — डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के करीब।
- सुस्त अर्निंग ग्रोथ — कई कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे।
- हाई वैल्यूएशन — भारतीय बाजार महंगा माना जा रहा है।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) और खुदरा निवेशक बाजार को संभाले हुए हैं। DII ने FPI की बिकवाली का बड़ा हिस्सा खरीदा है।
क्या कहते हैं विश्लेषक?
विश्लेषकों का मानना है कि साउथ कोरिया की सफलता AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर निर्भर है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बुनियाद पर खड़ी है। भारत में:
- मजबूत घरेलू खपत
- इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश
- डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार
ये कारक लंबे समय में बाजार को सपोर्ट करेंगे। हालांकि, शॉर्ट टर्म में FPI की बिकवाली और ग्लोबल रिस्क ऑफ सेंटिमेंट दबाव बना सकते हैं।
आगे क्या?
- साउथ कोरिया का मार्केट AI थीम पर आगे बढ़ रहा है।
- भारत को अपनी अर्निंग ग्रोथ सुधारने और FPI को आकर्षित करने की जरूरत है।
- आने वाले महीनों में अगर अर्निंग सीजन अच्छा रहा और रुपया स्थिर हुआ, तो भारतीय बाजार फिर से रिकवर कर सकता है।
विश्लेषक मानते हैं कि दोनों बाजारों की ताकत अलग-अलग है — साउथ कोरिया टेक और एक्सपोर्ट ड्रिवन है, जबकि भारत डोमेस्टिक डिमांड और लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पर टिका है।