ग्लोबल टूरिज्म का सेंटर बनेगा उज्जैन, CM डॉ. मोहन यादव बोले – “हमारे देवालय भी लोकतंत्र का आधार”
- उज्जैन में आयोजित हुआ द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन ‘रूह Mantic’
- आत्म चिंतन के लिए भारत से अच्छा दुनिया में कोई स्थान नहीं
- केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा- मध्यप्रदेश हार्ट ऑफ इंक्रेडिबल इंडिया
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के धार्मिक पर्यटन को गति दी
उज्जैन में हुआ वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन
भोपाल/उज्जैन। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से 27 अगस्त का दिन मध्यप्रदेश के लिए बेहद खास रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यटन-संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 27 अगस्त को उज्जैन में द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन ‘रूह Mantic’ का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में सरकार-प्रशासन से लेकर संतों ने प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को लेकर गंभीर मंथन किया। इस मंथन में यह बात निकल कर आई कि वह दिन दूर नहीं, जब उज्जैन वैश्विक पर्यटन का केंद्र होगा।
कार्यक्रम को सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों और इस्कॉन प्रमुख ने भी संबोधित किया। तिरुपति ट्रस्ट, शिरडी साईंबाबा ट्रस्ट और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
सीएम डॉ. मोहन यादव का संबोधन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन काल की नगरी है। आज का काल भारत का है। दुनिया में जो भारत से प्रतियोगिता कर रहे हैं, वे आज अपने आप को कमजोर मान रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक कलाएं और विद्या ग्रहण कीं। आत्म चिंतन के लिए भारत से अच्छा दुनिया में कोई स्थान नहीं है। आज देशों की सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन धर्म और संस्कृति की कोई सीमा नहीं हैं।
सीएम ने बताया कि भारतीय संस्कृति ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक फैली है। उज्जैन में 1000 बीघा जमीन पर बाबा महाकाल का मंदिर बना हुआ है। आनंदपुर धाम में निरंकारी भाव से गुरु महाराज की भक्ति की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमें प्रकृति के साथ मिलकर चलने की सीख दी है। भगवान की भक्ति के साथ शरीर की क्षमताओं का उपयोग करें। पर्यटन और तीर्थाटन के माध्यम से जनकल्याण की कल्पना इस आयोजन से की गई है।
सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में आध्यात्मिक पर्यटन को गति प्रदान की है। देवी अहिल्या बाई ने काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर बनवाया। उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने 2000 साल पहले मंदिर बनवाया था, जिसे बाबर के काल में गिरा दिया गया।
उन्होंने कहा कि देश का पुराना संसद भवन मुरैना के मंदिर और नया भवन विदिशा के बीजापुर मंदिर के डिजाइन पर बना है, ये गर्व की बात है। हमारे देवालय भी लोकतंत्र का आधार हो सकते हैं।
उज्जैन में लगातार बढ़ रहा पर्यटन
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज पूरा विश्व प्रथम पूज्य श्रीगणेश की आराधना में लीन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश को विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है।
उन्होंने कहा कि विश्व में अनेक संस्कृतियों का जन्म हुआ, लेकिन भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत है। हमारी संस्कृति ने 2000 साल तक आक्रमण झेला, 200 साल की गुलामी झेली, लेकिन आज भारतीय संस्कृति समृद्ध है।
शेखावत ने बताया कि भारत में तीर्थाटन की परंपरा प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने केरल से पर्सिया तक 24 हजार किलोमीटर की यात्रा कर भारतीय संस्कृति से दुनिया का परिचय कराया। प्रयागराज महाकुंभ इसका उदाहरण है, जहां हर मत और संप्रदाय के लोग एक मंच पर आए।
उन्होंने कहा कि पहले जितने लोग साल भर में उज्जैन आते थे, अब उतने लोग एक से डेढ़ हफ्ते में आ जाते हैं। भारत में पिछले साल 250 करोड़ लोगों ने घरेलू यात्रा की और यह संख्या 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।
वेदांत और अद्वैत के दर्शन से परिचित होंगे पर्यटक
प्रमुख सचिव, संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि कोविड काल के बाद मध्य प्रदेश में वर्ष 2023 में 11 करोड़, वर्ष 2024 में 13 करोड़ पर्यटक पहुंचे।
प्रदेश में धार्मिक पर्यटन स्थलों में उज्जैन सबसे ऊपर है, जहां पिछले साल 7 करोड़ लोगों ने दर्शन किए। महाकाल लोक के निर्माण से पर्यटन को नई ऊंचाई मिली है।
उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 109 फीट की मूर्ति स्थापित की गई है और 2200 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गई है। उज्जैन के पास जनापाव को विकसित किया जा रहा है और अमरकंटक में नर्मदा मैया के तटों को संवारा जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन ही थी भारत की पहचान
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल पाराशर ने कहा कि पिछले एक साल में भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ लोग पहुंचे।
अयोध्या राम मंदिर और काशी विश्वनाथ में भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
पीएचडी-सीसीआई के अध्यक्ष डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि उज्जैन में स्पिरिचुअल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित करना बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन तेजी से आगे बढ़ रहा है।
संजिव अग्रवाल ने कहा कि प्राचीन काल में भारत स्पिरिचुअल टूरिज्म से पहचाना जाता था। उज्जैन और ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग विद्यमान हैं। इस्कॉन उज्जैन के प्रमुख ने कहा कि तीर्थों का विकास करने से पर्यटकों की आध्यात्मिक यात्रा शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि भारत की जीडीपी का 2.5 प्रतिशत सिर्फ स्पिरिचुअल टूरिज्म से आता है और इसे और बढ़ाने की आवश्यकता है।