चीनी उद्योग इथेनॉल के उपयोग से जीवित बचा: नितिन गडकरी

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ईंधन मिश्रण नीति ने उद्योग को नई जान दी

परिचय

नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 15 सितंबर 2025 को कहा कि चीनी उद्योग इथेनॉल के उपयोग के कारण ही बचा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इथेनॉल मिश्रण नीति में बदलाव किया गया, तो चीनी मिलें बंद हो जाएंगी। गडकरी ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (NAFED) के वार्षिक सम्मेलन में यह टिप्पणी की।

उद्योग की चुनौतियां और इथेनॉल का योगदान

गडकरी ने बताया कि चीनी उद्योग लंबे समय से संकट में था, लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ने इसे नई दिशा दी। भारत ने 2025 तक 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया है, जिससे चीनी मिलों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला। उन्होंने कहा कि इथेनॉल से न केवल उद्योग को लाभ हुआ, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी बढ़ी। गडकरी ने जोर देकर कहा कि नीति में कोई बदलाव चीनी किसानों और मिल मालिकों के लिए विनाशकारी होगा।

सरकारी पहल और भविष्य

मंत्री ने सरकार की पहलों का जिक्र किया, जिसमें इथेनॉल उत्पादन के लिए सब्सिडी और बायोफ्यूल नीति शामिल हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे इथेनॉल उत्पादन में भाग लें, जिससे उनकी आय दोगुनी हो सकती है। गडकरी ने कहा कि भारत को आयात पर निर्भरता कम करनी होगी, और इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष

गडकरी की टिप्पणी चीनी उद्योग के लिए एक चेतावनी है। इथेनॉल नीति की निरंतरता से न केवल उद्योग बचेगा, बल्कि किसानों का कल्याण भी होगा। यह कदम भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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