पूर्वी तट पर विश्वस्तरीय ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित करने के लिए एमडीएल ने तमिलनाडु सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए
15,000 करोड़ के निवेश से 45,000 नौकरियां सृजित होंगी, राज्य बनेगा वैश्विक जहाज निर्माण हब
चेन्नई: भारत के प्रमुख युद्धपोत निर्माणकर्ता मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने तमिलनाडु सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत पूर्वी तट पर एक विश्वस्तरीय ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित किया जाएगा। यह कदम तमिलनाडु को वैश्विक जहाज निर्माण क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा प्रयास है। एमओयू के तहत एमडीएल 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जो लगभग 45,000 नौकरियों (5,000 प्रत्यक्ष और 40,000 अप्रत्यक्ष) का सृजन करेगा। यह घोषणा गुजरात के भावनगर में आयोजित एक समुद्री उद्योग कार्यक्रम के दौरान की गई, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में एमओयू का आदान-प्रदान हुआ।
एमओयू का विवरण और महत्व
एमडीएल, जो भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोतों और पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए जाना जाता है, अब व्यावसायिक जहाज निर्माण में भी अपनी क्षमता का विस्तार करेगा। यह नया शिपयार्ड तूतीकोरिन (थूथुकुदी) जिले में स्थापित किया जाएगा, जो राज्य के समुद्री बुनकर को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक स्थान है। तमिलनाडु के उद्योग, निवेश संवर्धन एवं वाणिज्य मंत्री टी.आर.बी. राजा ने कहा, “यह एमओयू तमिलनाडु के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। इससे राज्य वैश्विक जहाज निर्माण और समुद्री नवाचार का केंद्र बनेगा।”
यह एमओयू कोच्चिन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ हस्ताक्षरित एक अन्य एमओयू के साथ जुड़ता है, जो कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश और 55,000 नौकरियों का वादा करता है। कोच्चिन शिपयार्ड 15,000 करोड़ रुपये निवेश कर एक ग्रीन कमर्शियल शिपयार्ड स्थापित करेगा, जो पहले चरण में 10,000 नौकरियां पैदा करेगा। ये परियोजनाएं भारत की ‘मारिटाइम इंडिया विजन 2030’ को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
वर्तमान में भारत का जहाज निर्माण उद्योग वैश्विक बाजार में मात्र 1% से कम हिस्सेदारी रखता है, जबकि चीन की हिस्सेदारी 61% है। एस एंड पी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स के अनुसार, भारत 16वें स्थान पर है। ये ग्रीनफील्ड शिपयार्ड इस कमी को दूर करने में मदद करेंगे। एमडीएल के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा, “हमारी विशेषज्ञता को व्यावसायिक क्षेत्र में ले जाना भारत को शीर्ष पांच जहाज निर्माण राष्ट्रों में शामिल करने की दिशा में एक कदम है।”
तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में ‘तमिलनाडु मैरिटाइम ट्रांसपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025’ की घोषणा की है, जो जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगी। एसआईपीसीओटी और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी के बीच पहले से ही एक एसपीवी (स्पेशल पर्पस व्हीकल) का गठन हो चुका है, जो इन परियोजनाओं का समर्थन करेगा।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
ये शिपयार्ड न केवल रोजगार सृजन करेंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे। तूतीकोरिन जैसे क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की ट्रेनिंग, आपूर्ति श्रृंखला का विकास और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का उपयोग होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निर्यात बढ़ेगा और विदेशी निवेश आकर्षित होगा। भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर कहा, “ये अल्ट्रा मेगा एमओयू तमिलनाडु को समुद्री विनिर्माण शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।”
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
हालांकि, परियोजना को मंजूरी, भूमि अधिग्रहण और तकनीकी एकीकरण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। फिर भी, केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से ये बाधाएं दूर की जा सकती हैं। किगएम के अनुसार, 2047 तक भारत की क्षमता को 11.31 मिलियन ग्रॉस टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है, जिसमें तमिलनाडु की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
एमडीएल के इस एमओयू से तमिलनाडु न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि भारत के समुद्री क्षेत्र को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक ठोस योगदान है।