रुपया लगातार दूसरे दिन ऑलटाइम लो पर: 1 डॉलर के मुकाबले 23 पैसे गिरकर 91.01 पर आया
FII की भारी निकासी और US-India ट्रेड डील में देरी से दबाव, RBI इंटरवेंशन से और गिरावट रोकी; इंपोर्ट महंगे, निर्यातकों को फायदा
भारतीय रुपया लगातार दूसरे दिन ऑलटाइम लो पर पहुंच गया है। मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे गिरकर 91.01 पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। दिन के कारोबार में रुपया 91.14 तक गिरा था, लेकिन RBI की इंटरवेंशन से कुछ रिकवरी हुई। यह गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली, US-India ट्रेड डील में अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती से प्रभावित है। 2025 में रुपया 6% से अधिक कमजोर हो चुका है, जो एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्राओं में से एक है। इससे इंपोर्ट महंगे होंगे, लेकिन निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा।
गिरावट के कारण: FII आउटफ्लो और ट्रेड अनिश्चितता
रुपये की इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से FII की निकासी है। 2025 में अब तक FII ने ₹1.55 लाख करोड़ से अधिक की भारतीय एसेट्स बेची हैं, जो अमेरिकी टैरिफ (50% तक) और ट्रेड डील में देरी से प्रभावित है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां टैरिफ से निर्यात कमजोर हुए। इसके अलावा, इंपोर्ट बिल और डॉलर डिमांड बढ़ने से दबाव पड़ा।
ट्रेडर्स के अनुसार, RBI ने डॉलर बेचकर इंटरवेंशन किया, जिससे रुपया 91.14 से 91.01 पर बंद हुआ। पिछले 10 ट्रेडिंग सेशन में रुपया 90 से 91 तक गिरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेड डील में ब्रेकथ्रू न होने से दबाव बरकरार रहेगा, लेकिन RBI के रिजर्व्स ($687 बिलियन) से स्थिरता बनी रहेगी।
अर्थव्यवस्था पर असर: इंपोर्ट महंगे, निर्यात को बूस्ट
रुपये की कमजोरी से तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और गोल्ड जैसे इंपोर्ट महंगे होंगे, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं। लेकिन निर्यातक (IT, टेक्सटाइल, फार्मा) को फायदा मिलेगा, क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में बढ़ेगी। व्यापार घाटा नवंबर में $24.53 बिलियन पर 5 महीने के निचले स्तर पर आया, जो कुछ राहत है। RBI की हालिया रेट कट और लिक्विडिटी उपायों से अर्थव्यवस्था को सपोर्ट मिलेगा।
| मुख्य आंकड़े | विवरण |
|---|---|
| वर्तमान रेट | 1 USD = ₹91.01 |
| दिन का लो | ₹91.14 |
| पिछले क्लोज | ₹90.78 |
| सालाना गिरावट | 6%+ |
| FII आउटफ्लो (2025) | ₹1.55 लाख करोड़+ |
आंकड़े: इंटरबैंक फॉरेक्स और रिपोर्ट्स से।
भविष्य का अनुमान: रिकवरी की उम्मीद
विशेषज्ञ अनुमान लगाते हैं कि यदि US-India ट्रेड डील में प्रगति हुई, तो रुपया 88-90 के दायरे में रिकवर कर सकता है। RBI की सतर्क इंटरवेंशन से अचानक क्रैश का खतरा कम है। 2026 में रुपया स्थिर रहने का अनुमान है। निवेशकों को वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष
रुपये का लगातार दूसरा ऑलटाइम लो FII निकासी और ट्रेड अनिश्चितता का नतीजा है। इससे इंपोर्ट महंगे होंगे, लेकिन निर्यात को बूस्ट मिलेगा। RBI की नीतियां स्थिरता प्रदान करेंगी। भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, जो लंबे समय में रिकवरी सुनिश्चित करेगी। निवेशक सतर्क रहें, लेकिन पैनिक न करें।