FII आउटफ्लो जारी: जनवरी के पहले पखवाड़े में शेयर बाजार से ₹22,530 करोड़ बाहर, हाई वैल्यूएशन और कमजोर रुपया मुख्य कारण

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जनवरी 2026 में अब तक ₹22,530 करोड़ की बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी में दबाव; DII ने ₹18,200 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभाला

जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से भारी बिकवाली की है। डिपॉजिटरी डेटा के अनुसार, FII ने इस अवधि में कुल ₹22,530 करोड़ की नेट बिकवाली की, जो इस साल अब तक की सबसे बड़ी मासिक निकासी में से एक है। इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹18,200 करोड़ की मजबूत खरीदारी की, जिससे बाजार में गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित रही।

FII बिकवाली के प्रमुख कारण

  • हाई वैल्यूएशन: निफ्टी का P/E रेशियो 24.5 के आसपास है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर है। FII इसे महंगा मानकर प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं।
  • कमजोर रुपया: रुपया 91.01 के ऑलटाइम लो पर पहुंचा, जिससे डॉलर में रिटर्न प्रभावित हो रहा है। FII के लिए रुपया कमजोर होने से भारत में निवेश का आकर्षण कम हुआ।
  • ग्लोबल अनिश्चितता: अमेरिकी फेड की ब्याज दरों पर अनिश्चितता, ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियां और चीन-अमेरिका ट्रेड टेंशन से जोखिम-ऑफ सेंटिमेंट बना हुआ है।
  • ट्रेड डील में देरी: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में प्रगति न होने से भी FII सतर्क हैं।

बाजार पर असर: सेंसेक्स-निफ्टी में दबाव

जनवरी के पहले 15 दिनों में:

  • सेंसेक्स लगभग 1,200 अंक गिरा (85,800 से नीचे आया)।
  • निफ्टी 350 अंकों से अधिक गिरकर 25,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है।
  • मिडकैप और स्मॉलकैप में 4-6% तक की गिरावट।

हालांकि, बैंकिंग, FMCG और IT सेक्टर में चुनिंदा खरीदारी से बाजार पूरी तरह ढहने से बचा।

DII की मजबूत खरीदारी से बाजार संभला

घरेलू संस्थागत निवेशकों (म्यूचुअल फंड्स, इंश्योरेंस कंपनियां, पेंशन फंड्स) ने FII की बिकवाली का काउंटर किया। जनवरी के पहले 15 दिनों में DII ने ₹18,200 करोड़ की नेट खरीदारी की, जो FII आउटफ्लो का लगभग 81% कवर कर रही है।

विशेषज्ञों की राय

  • कोटक सिक्योरिटीज: हाई वैल्यूएशन और FII आउटफ्लो से शॉर्ट-टर्म में दबाव रहेगा, लेकिन DII और मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स से रिकवरी संभव है।
  • मोतीलाल ओसवाल: रुपया 91 के पार जाने से FII के लिए भारत में निवेश का रिटर्न प्रभावित हो रहा है। ट्रेड डील में प्रगति से रिवर्सल संभव।
  • जेपी मॉर्गन: भारत अभी भी उभरते बाजारों में सबसे आकर्षक है, लेकिन वैल्यूएशन कंट्रोल में आने तक FII सतर्क रहेंगे।

निष्कर्ष

जनवरी के पहले 15 दिनों में FII की ₹22,530 करोड़ की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया, लेकिन DII की मजबूत खरीदारी ने गिरावट को सीमित रखा। हाई वैल्यूएशन, कमजोर रुपया और वैश्विक अनिश्चितताएं मुख्य कारण हैं। निवेशकों को शॉर्ट-टर्म में सतर्क रहने और लॉन्ग-टर्म में मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों पर फोकस करने की सलाह दी जा रही है। ट्रेड डील और FII फ्लो पर नजर रखना जरूरी है।

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