होर्मुज रूट खुलने के बाद कच्चा तेल 86 डॉलर पर आया, 13% सस्ता हुआ; अमेरिकी शेयर बाजार 2% चढ़ा
ईरान के फैसले से वैश्विक तेल बाजार में राहत, भारत को महंगाई और आयात बिल पर बड़ा राहत का संकेत; वॉल स्ट्रीट पर भी जोरदार तेजी
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को कमर्शियल जहाजों के लिए फिर से खोल दिए जाने के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी राहत देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत एक दिन में 13 प्रतिशत गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इसी के साथ अमेरिकी शेयर बाजार में भी जोरदार तेजी आई और प्रमुख इंडेक्स 2 प्रतिशत तक चढ़ गए।
ईरान के फैसले से दुनिया भर के तेल टैंकर अब होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी बाधा के गुजर सकेंगे। इस रूट से विश्व का लगभग 20-25 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। ईरान-इजराइल तनाव के दौरान इस रूट के बंद होने की आशंका से तेल की कीमतें $98 तक पहुंच गई थीं। अब राहत की खबर से बाजार में सकारात्मक सेंटिमेंट लौट आया है।
भारत के लिए यह खबर खासतौर पर महत्वपूर्ण है। देश अपना लगभग 45-50 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की आशंका से पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा था। अब तेल की कीमतों में आई गिरावट से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
बाजार पर असर
- अमेरिकी बाजार: वॉल स्ट्रीट पर Dow Jones 1.8%, S&P 500 2.1% और Nasdaq 2.4% ऊपर चढ़ा। ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में खासा उछाल देखा गया।
- रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपया 94.80 के स्तर से सुधरकर 94.35 पर आ गया।
विशेषज्ञों की राय
- अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य रहा तो भारत को तेल आयात बिल में मासिक ₹7,000-9,000 करोड़ की बचत हो सकती है।
- टैक्स विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अगर तेल की कीमतें फिर से $90 के ऊपर चली गईं तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
- गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह राहत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने ईरान पर प्रतिबंध जारी रखने की बात कही है।
भारत के लिए क्या मतलब?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। तेल की कीमतों में गिरावट से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है। साथ ही रुपए पर दबाव भी कम होगा। सरकार और RBI दोनों इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान-इजराइल तनाव और कम हुआ तो तेल की कीमतें आगे भी नियंत्रण में रह सकती हैं। लेकिन अगर फिर से कोई तनाव बढ़ा तो तेल बाजार में नई उछाल आ सकती है।
निष्कर्ष ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट खोलने का फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को इससे सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल है, लेकिन भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।