भारत के कोर सेक्टर में मार्च 2026 में 0.4% की गिरावट, 8 महीने बाद सबसे कम वृद्धि
भारत के आठ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों (कोर सेक्टर) में मार्च 2026 में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले आठ महीनों में सबसे कमजोर प्रदर्शन दर्शाता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में कोर सेक्टर की वृद्धि 4.1% थी, जो मार्च में नकारात्मक हो गई।
कोर सेक्टर में शामिल आठ उद्योग , कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली अर्थव्यवस्था की सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक माने जाते हैं। इनका कुल वजन औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27% है।
गिरावट के प्रमुख कारण
- सीमेंट उत्पादन में 6.2% की भारी गिरावट
- कोयला उत्पादन में 3.8% की कमी
- रिफाइनरी उत्पादन में 1.9% की गिरावट
- स्टील और उर्वरक क्षेत्र में भी नकारात्मक वृद्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च में निर्माण गतिविधियों में आई कमी और कुछ राज्यों में चुनावी प्रभाव के कारण सीमेंट और स्टील की मांग घटी है। इसके अलावा, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में भी निरंतर कमी देखी जा रही है।
सकारात्मक पक्ष
बिजली उत्पादन में 2.1% की वृद्धि दर्ज की गई, जो गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली की मांग को दर्शाता है। हालांकि, कुल कोर सेक्टर के नकारात्मक आंकड़े ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत दिए हैं।
अर्थव्यवस्था पर असर
कोर सेक्टर की यह गिरावट औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) पर भी असर डालेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मार्च में IIP की वृद्धि भी 2% से नीचे रह सकती है। इससे GDP ग्रोथ के अनुमान पर भी दबाव बढ़ सकता है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने और MSME सेक्टर को सपोर्ट देने के लिए नए कदम जल्द ही घोषित किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
- क्रिसिल रिसर्च: “कोर सेक्टर में नकारात्मक वृद्धि चिंता का विषय है। निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में मांग कमजोर पड़ रही है।”
- मोतीलाल ओसवाल: “मार्च का आंकड़ा अस्थायी हो सकता है, लेकिन अगर अगले कुछ महीनों में सुधार नहीं हुआ तो पूरे वित्त वर्ष की ग्रोथ पर असर पड़ेगा।”
निष्कर्ष
मार्च 2026 में कोर सेक्टर की 0.4% की गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। सरकार को अब इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। यदि कोर सेक्टर में सुधार नहीं हुआ तो पूरे वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।