ईरान-इजराइल जंग की वजह से भारत में उर्वरक उत्पादन 25% घटा: जानें प्रोडक्शन घटने के क्या कारण हैं और इसका देश पर क्या असर होगा?

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कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से यूरिया-डीएपी उत्पादन प्रभावित; सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की तैयारी शुरू की

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। देश में उर्वरक उत्पादन पिछले एक महीने में औसतन 25% घट गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण हुई है, जो उर्वरक निर्माण का प्रमुख कच्चा माल हैं।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उपभोक्ता देश है। हर साल देश में लगभग 650 लाख टन उर्वरक की जरूरत पड़ती है, जिसमें से करीब 55-60% आयात किया जाता है। बाकी घरेलू उत्पादन पर निर्भर है। ईरान-इजराइल संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर बने संकट ने गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे भारतीय उर्वरक कारखानों में उत्पादन क्षमता घट गई।

उत्पादन घटने के प्रमुख कारण

  1. प्राकृतिक गैस की कमी यूरिया और अन्य नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का उत्पादन मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है। होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई, जिससे कई बड़े प्लांट्स में उत्पादन 30-40% तक कम हो गया।
  2. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से फॉस्फेटिक उर्वरकों (डीएपी, एनपीके) की उत्पादन लागत बढ़ गई। कई कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया।
  3. लॉजिस्टिक्स और शिपिंग समस्या बीमा कंपनियों ने होर्मुज रूट पर प्रीमियम बढ़ा दिया, जिससे आयात महंगा और जटिल हो गया।

देश पर क्या असर पड़ेगा?

  • किसानों पर बोझ — उर्वरक की कमी से खरीफ सीजन की तैयारी प्रभावित हो सकती है। अगर समय पर खाद नहीं मिली तो फसल उत्पादन घट सकता है।
  • खाद की कीमतें बढ़ना — घरेलू उत्पादन घटने से आयात बढ़ेगा, जिससे सब्सिडी का बोझ सरकार पर बढ़ेगा या बाजार में खाद महंगी हो जाएगी।
  • महंगाई का खतरा — खाद महंगी होने से कृषि लागत बढ़ेगी, जिसका असर अनाज, सब्जी और फलों की कीमतों पर पड़ेगा।
  • कृषि निर्यात पर असर — उत्पादन घटने से निर्यात प्रभावित हो सकता है।

सरकार की तैयारी

केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। सरकार ने रूस, कनाडा और सऊदी अरब जैसे वैकल्पिक स्रोतों से उर्वरक आयात बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कोयला आधारित प्लांट्स को अतिरिक्त गैस उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

कृषि अर्थशास्त्री डॉ. पी.के. जोशी ने कहा, 25% उत्पादन गिरावट चिंता का विषय है। अगर अप्रैल-मई तक स्थिति नहीं सुधरी तो खरीफ फसल पर असर पड़ सकता है। सरकार को तुरंत आयात बढ़ाना चाहिए।

निष्कर्ष

ईरान-इजराइल जंग के कारण भारत में उर्वरक उत्पादन में 25% की गिरावट एक गंभीर चेतावनी है। किसानों की फसल, खाद की उपलब्धता और महंगाई तीनों पर इसका असर पड़ सकता है। सरकार को अब त्वरित कदम उठाकर वैकल्पिक व्यवस्था करने होंगे, ताकि देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित न हो।

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