भारत का रक्षा क्षेत्र शानदार उछाल पर: एक दशक में उत्पादन 174% बढ़ा, निर्यात 34 गुना हुआ
₹1.54 लाख करोड़ का रिकॉर्ड उत्पादन, ₹23,622 करोड़ के निर्यात से आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव; डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- ‘मेक इन इंडिया’ का कमाल
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज संसद में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया है। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज करते हुए ₹1.54 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा 2014-15 के मुकाबले 174 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्शाता है।
साथ ही, देश का रक्षा निर्यात भी ₹23,622 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो एक दशक पहले की तुलना में 34 गुना बढ़ गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की बड़ी सफलता बताया।
दशक भर का सफर
2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन मात्र ₹55,000 करोड़ के आसपास था। दस साल में यह लगभग तीन गुना होकर ₹1.54 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इसी दौरान निर्यात महज ₹700 करोड़ से बढ़कर ₹23,622 करोड़ हो गया। यह वृद्धि न सिर्फ मात्रा में है बल्कि गुणवत्ता और विविधता में भी है।
आज भारतीय कंपनियां विश्व स्तर के हथियार, सेंसर, रडार, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, आर्मर्ड व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम बना रही हैं। ब्रह्मोस, अकाश, तेजस, धनुष तोप, पिनाका रॉकेट सिस्टम और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसी देसी तकनीकें अब विदेशों में भी निर्यात हो रही हैं।
सरकार की रणनीति का असर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार किए गए। पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट, FDI में 74% तक छूट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल और डिफेंस एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम जैसी पहलें रंग ला रही हैं।”
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:
- निजी क्षेत्र का योगदान अब 25% से ऊपर पहुंच गया है।
- MSMEs की भागीदारी बढ़कर हजारों कंपनियों तक पहुंच गई है।
- 5,000+ स्टार्टअप्स और 400+ रक्षा उद्योगों ने इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
- 100+ देशों को भारतीय रक्षा सामग्री निर्यात हो रही है।
आर्थिक और सामरिक महत्व
यह वृद्धि सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की कहानी है। रक्षा उत्पादन बढ़ने से विदेशी मुद्रा खर्च कम हुआ, आयात निर्भरता घटी और लाखों युवाओं को उच्च कुशल नौकरियां मिलीं। निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ और भारत वैश्विक रक्षा सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक रक्षा उत्पादन ₹3 लाख करोड़ और निर्यात ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
चुनौतियां और आगे की राह
हालांकि चुनौतियां भी मौजूद हैं। उन्नत तकनीकी ज्ञान का हस्तांतरण, कुशल जनशक्ति का विकास, सप्लाई चेन मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। सरकार अब ISM (India Semiconductor Mission), DRDO के लैब-टू-लैंड मॉडल और iDEX स्कीम के जरिए इन कमियों को दूर करने पर जोर दे रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा, “हम न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं बल्कि विश्व को विश्वसनीय रक्षा उपकरण उपलब्ध करा रहे हैं। यह ‘मेक इन इंडिया, फॉर द वर्ल्ड’ का सच्चा उदाहरण है।”
भारत अब दुनिया के टॉप-25 रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो चुका है। इस उपलब्धि से सैन्य क्षमता बढ़ने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति मिल रही है। रक्षा क्षेत्र की यह सफलता ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।