विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली: मई में ₹14,231 करोड़ निकाले, 2026 में कुल ₹2 लाख करोड़ पार

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ग्लोबल अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और जोखिम से बचाव की वजह से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव; घरेलू निवेशक संभाल रहे मोर्चा

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI/FII) भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। मई 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने ₹14,231 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे हैं। इस साल की शुरुआत से अब तक कुल बिकवाली ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंच चुकी है। एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, यह लगातार तीसरा महीना है जब विदेशी निवेशक शुद्ध रूप से बिकवाली कर रहे हैं।

बिकवाली के मुख्य कारण

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजार में व्याप्त अनिश्चितता इस बिकवाली का सबसे बड़ा कारण है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर असमंजस और वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं ने जोखिम से बचाव (Risk Aversion) को बढ़ावा दिया है।

इसके अलावा, भारत VIX (India VIX) में तेजी देखी गई है, जो बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत है। विदेशी निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भारतीय बाजार से बाहर निकल रहे हैं।

बाजार पर असर

इस लगातार बिकवाली से निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव बना हुआ है। मई में बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) इस बिकवाली को संभाल रहे हैं और बाजार को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

2025 में भी विदेशी निवेशकों ने ₹1.66 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की थी। 2026 में यह आंकड़ा पहले से ही उस स्तर को पार कर चुका है।

विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिकवाली मुख्य रूप से वैश्विक कारकों से प्रेरित है, न कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी कमजोरी से। भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बुनियाद पर खड़ी है। GDP ग्रोथ, कॉर्पोरेट आय, और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार अभी भी सकारात्मक बने हुए हैं।

कई विश्लेषक मानते हैं कि जब वैश्विक अनिश्चितता कम होगी, विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाजार की ओर लौट सकते हैं। फिलहाल, घरेलू निवेशकों का भरोसा और मजबूत खुदरा भागीदारी बाजार को संभाले हुए है।

आगे क्या?

बाजार में सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। साप्ताहिक ऑप्शन एक्सपायरी, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखनी होगी। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ता है तो बाजार में और दबाव आ सकता है। वहीं, अगर स्थिति सामान्य होती है तो विदेशी निवेशकों की वापसी संभव है।

विदेशी निवेशकों की इस लगातार बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार की दीर्घकालिक संभावनाएं अभी भी मजबूत मानी जा रही हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों का समर्थन इस चुनौतीपूर्ण समय में बाजार की रीढ़ बना हुआ है।

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