भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट, छठे स्थान पर खिसका; ब्रिटेन पांचवें नंबर पर पहुंचा

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रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी और डॉलर की मजबूती से भारत छठे स्थान पर खिसक गया; ब्रिटेन ने पांचवां स्थान छीन लिया, IMF के आंकड़ों में बड़ा बदलाव


नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक मानी जाती रही है, लेकिन हालिया आंकड़ों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में छठे स्थान पर खिसक गया है। ब्रिटेन पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।

इस गिरावट का प्रमुख कारण रुपए की लगातार कमजोरी है। पिछले कुछ महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.22 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे भारत की जीडीपी का डॉलर में मूल्यांकन घट गया।

क्यों हुआ यह बदलाव?

  • रुपए की गिरावट: मार्च के अंत तक रुपया 95.22 प्रति डॉलर के स्तर को छू गया। एक साल में रुपए में करीब 8% की कमजोरी आई है।
  • ब्रिटेन की मजबूती: ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रही और पाउंड स्टर्लिंग की तुलनात्मक मजबूती ने उसे पांचवें स्थान पर पहुंचा दिया।
  • तेल और आयात बिल: मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ा और व्यापार घाटा फैला।
  • FII आउटफ्लो: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपए पर दबाव बढ़ाया।

IMF के अनुसार, 2025 के अंत में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 3.94 ट्रिलियन डॉलर था, जबकि ब्रिटेन की 3.97 ट्रिलियन डॉलर हो गई। इसी कारण भारत छठे स्थान पर आ गया।

अर्थव्यवस्था पर असर

  • महंगाई का खतरा: रुपए की कमजोरी से आयातित सामान (तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना आदि) महंगा हो रहा है, जिससे खुदरा महंगाई बढ़ सकती है।
  • निर्यातकों को फायदा: कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए फायदेमंद है, लेकिन आयात पर निर्भर उद्योगों को नुकसान हो रहा है।
  • निवेशकों की प्रतिक्रिया: विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क हैं, जिससे पूंजी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।

सरकार का पक्ष

वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह गिरावट अस्थायी है। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण भारत की वास्तविक विकास दर अभी भी मजबूत है। वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान है।

विशेषज्ञों की राय

  • अर्थशास्त्रीों का कहना है कि रुपए की कमजोरी को नियंत्रित करने के लिए RBI को और सक्रिय हस्तक्षेप करना चाहिए।
  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें $95 के ऊपर बनी रहीं तो भारत की अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ेगा।

निष्कर्ष

भारत की अर्थव्यवस्था का विश्व रैंकिंग में छठे स्थान पर खिसकना एक चेतावनी है। रुपए की कमजोरी और वैश्विक तेल संकट मुख्य चुनौतियां हैं। हालांकि, सरकार और RBI के पास अभी भी मजबूत नीतिगत उपकरण उपलब्ध हैं। अगर सही समय पर सही कदम उठाए गए तो भारत अपनी विकास गति को फिर से हासिल कर सकता है।

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