थोक महंगाई 38 महीने के उच्चतम स्तर पर: मार्च में WPI बढ़कर 3.88% पहुंची, खाने-पीने का सामान और ईंधन हुआ महंगा
नई दिल्ली: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई मार्च 2026 में 38 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में थोक महंगाई बढ़कर 3.88% हो गई, जो फरवरी के 2.93% से काफी ज्यादा है।
यह आंकड़ा फरवरी 2023 के बाद सबसे ऊंचा है।
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण
- खाद्य वस्तुओं में तेज उछाल — आलू, प्याज, टमाटर, अनाज और दालों की थोक कीमतें बढ़ीं।
- ईंधन और बिजली — कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और घरेलू स्तर पर ईंधन की मांग बढ़ने से यह मद महंगा हुआ।
- विनिर्माण उत्पाद — कुछ औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर।
सेक्टर-वार स्थिति
- खाद्य वस्तुएं: 6.2% (फरवरी में 4.1%)
- ईंधन और बिजली: 5.8% (फरवरी में 3.9%)
- विनिर्माण: 2.4% (फरवरी में 2.1%)
मंत्रालय के अनुसार, मार्च में थोक महंगाई मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं और ईंधन की महंगाई के कारण बढ़ी है।
अर्थव्यवस्था पर असर
- खुदरा महंगाई (CPI) पर भी दबाव बढ़ सकता है।
- उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
- RBI की मौद्रिक नीति पर भी प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि वर्तमान में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है।
विशेषज्ञों की राय
- क्रिसिल: थोक महंगाई में यह उछाल मुख्य रूप से खाद्य और ऊर्जा कीमतों के कारण है। अगर यह रुझान जारी रहा तो अप्रैल में खुदरा महंगाई भी बढ़ सकती है।
- मोतीलाल ओसवाल: निवेशकों को FMCG, ऑटो और केमिकल सेक्टर में सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इनकी लागत बढ़ने वाली है।
सरकार ने कहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।