पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगे, निर्यात पर भी ₹3 टैक्स: आम आदमी पर दोहरा बोझ, किल्लत रोकने का फैसला
तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाईं, सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया और डीजल-ATF पर ड्यूटी घटाई; मिडिल ईस्ट संकट के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश
आम आदमी को बड़ा झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने 15 मई 2026 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर हो गई है। साथ ही, केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर ₹3 प्रति लीटर का विंडफॉल गेन टैक्स (अप्रत्याशित लाभ कर) लगाया है, जबकि डीजल पर ड्यूटी घटाकर ₹16.5 प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹16 प्रति लीटर कर दी गई है।
कीमतें क्यों बढ़ीं?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव (अमेरिका-ईरान विवाद) के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। तेल कंपनियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा के दाम बढ़ने के चलते उन्हें कीमतें बढ़ानी पड़ीं। यह बढ़ोतरी लंबे समय बाद हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा। परिवहन, खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ने की आशंका है।
सरकार का दोहरा फैसला
सरकार ने एक तरफ पेट्रोल के निर्यात पर ₹3 प्रति लीटर टैक्स लगाया है (पहली बार इतना सीधा कदम), ताकि रिफाइनरियों के अत्यधिक मुनाफे पर लगाम लगे और घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो। दूसरी तरफ, डीजल और ATF पर ड्यूटी घटाई गई है, ताकि निर्यातकों (जैसे रिलायंस) को प्रोत्साहन मिले और घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, यह बदलाव 16 मई 2026 से लागू होगा। सरकार का उद्देश्य है कि मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो और आम उपभोक्ताओं को राहत मिले।
आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर असर
- उपभोक्ताओं पर बोझ: ₹3 की बढ़ोतरी से मासिक खर्च बढ़ेगा। टैक्सी, ऑटो, ट्रक और बस चालकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, जिसका असर अंततः आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
- महंगाई का खतरा: ईंधन महंगा होने से खाद्य पदार्थ, परिवहन और अन्य सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- तेल कंपनियों को राहत: ड्यूटी में कटौती से रिफाइनरियों के मार्जिन बेहतर होंगे।
- सरकार को राजस्व: निर्यात पर टैक्स से अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।
विशेषज्ञों की राय
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम संतुलित है। एक तरफ उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है, दूसरी तरफ घरेलू बाजार को प्राथमिकता दी गई है। लंबे समय तक तनाव बना रहा तो और बढ़ोतरी हो सकती है। RBI और सरकार महंगाई पर नजर रखे हुए हैं।
आगे क्या?
सरकार ने साफ किया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। अगर कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं तो कीमतें फिर कम की जा सकती हैं। आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि अनावश्यक यात्रा कम करें और ईंधन की बचत करें।
यह फैसला दिखाता है कि वैश्विक संकट के बीच सरकार घरेलू आपूर्ति और उपभोक्ताओं के हितों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।