थोक महंगाई एक महीने में दोगुनी: आम आदमी की जेब पर जल्द पड़ेगा असर
खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेजी से WPI 8 % के पार; रिटेल महंगाई बढ़ने का खतरा, सरकार और RBI सतर्क
नई दिल्ली | 15 मई 2026 विक्रम मालवीय, इकोनॉमी डेस्क
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अप्रैल 2026 में एक ही महीने में दोगुनी होकर 8.33 प्रतिशत पर पहुंच गई है। मार्च में यह 3.88 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों, खासकर सब्जियों, दालों और ईंधन की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक महंगाई का असर जल्द ही खुदरा महंगाई पर भी दिखेगा, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य मुद्रास्फीति में सबसे ज्यादा योगदान रहा। प्याज, टमाटर, आलू और दालों की थोक कीमतों में उछाल देखा गया। इसके अलावा, कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने भी थोक महंगाई को बढ़ावा दिया।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। इसके अलावा, मानसून से पहले सब्जियों की आपूर्ति में कमी और बढ़ती मांग ने भी कीमतों को प्रभावित किया है।
आम आदमी पर असर
थोक महंगाई बढ़ने का असर आमतौर पर 2-3 महीने में खुदरा महंगाई पर दिखता है। यानी जून-जुलाई तक बाजार में खाने-पीने की चीजें, दालें, तेल और सब्जियां और महंगी हो सकती हैं।
मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। पहले से ही रिटेल महंगाई 3.48 प्रतिशत के स्तर पर है, ऐसे में थोक महंगाई का दबाव बढ़ने से आम आदमी की क्रय शक्ति प्रभावित होगी।
सरकार और RBI की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि महंगाई पर कड़ी नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। RBI भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अगर थोक महंगाई का असर रिटेल पर पड़ा तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव पर विचार कर सकता है।
सरकार ने खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए भंडारण बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के उपाय शुरू कर दिए हैं।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू आपूर्ति में व्यवधान के कारण महंगाई का दबाव बना हुआ है। अगर मानसून अच्छा रहा और वैश्विक तेल की कीमतें स्थिर रहीं तो स्थिति सुधर सकती है। अन्यथा महंगाई 4 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है।
आगे की राह
थोक महंगाई में तेजी चिंता का विषय है, लेकिन अभी घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार और RBI दोनों ही स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें और कच्चे तेल के रुख पर निर्भर करेगा कि महंगाई कितनी बढ़ती है।
आम आदमी के लिए अभी सतर्क रहना और