खाने-पीने की चीजें महंगी: अप्रैल में रिटेल महंगाई 3.48% पर पहुंची, अमेरिका-ईरान तनाव से और बढ़ सकती है

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सब्जियां, दालें और खाद्य तेल महंगे होने से आम आदमी पर बोझ; RBI और सरकार की नजरें महंगाई पर, ग्लोबल अनिश्चितता ने बढ़ाई चिंता

देश में खुदरा मुद्रास्फीति (रिटेल इंफ्लेशन) अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है। मार्च में यह 3.34 प्रतिशत थी। खाने-पीने की चीजों, खासकर सब्जियों, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण है। साथ ही, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल से महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य मुद्रास्फीति अप्रैल में 4.8 प्रतिशत के स्तर पर रही। प्याज, टमाटर, आलू जैसी सब्जियों के साथ-साथ दालें और खाद्य तेल महंगे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई 3.72 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.21 प्रतिशत रही।

विश्लेषकों का कहना है कि खराब मौसम, फसल उत्पादन में कमी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा था कि खाद्य मुद्रास्फीति पर विशेष नजर रखी जा रही है।

अमेरिका-ईरान तनाव का असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। अगर स्थिति और बिगड़ती है तो पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत और अंततः खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा। इससे महंगाई 4 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है।

आम आदमी पर असर

महंगाई बढ़ने से आम परिवारों पर बोझ बढ़ा है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। सब्जियों और दालों की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे मासिक बजट प्रभावित हो रहा है।

सरकार और RBI की प्रतिक्रिया

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि महंगाई पर कड़ी नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। RBI ने भी संकेत दिया है कि यदि महंगाई 4 प्रतिशत से ऊपर जाती है तो मौद्रिक नीति में बदलाव किया जा सकता है। सरकार ने खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए भंडारण और आपूर्ति बढ़ाने के उपाय किए हैं।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है तो महंगाई और बढ़ सकती है। वहीं, अच्छे मानसून और फसल उत्पादन में सुधार से स्थिति बेहतर हो सकती है। RBI का लक्ष्य महंगाई को 4 प्रतिशत के आसपास रखना है।

सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों ही महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सतर्क हैं। आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें और वैश्विक तेल बाजार पर नजर रखना जरूरी होगा।

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