सरकार का बड़ा कदम: सोना-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी 15% की, व्यापार घाटा और रुपए को मिलेगा सहारा

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6% से बढ़ाकर 15% की गई ड्यूटी; सोने की मांग पर लगाम, विदेशी मुद्रा बचत और रुपए को स्थिरता देने की रणनीति, ज्वेलर्स और उपभोक्ताओं पर असर

केंद्र सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह कदम बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित करने और लगातार गिरते रुपए को सहारा देने के लिए उठाया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का चालू खाता घाटा (CAD) चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है और रुपया डॉलर के मुकाबले 84 के स्तर के करीब पहुंच गया है।

ड्यूटी बढ़ाने के मुख्य कारण

सरकार के अनुसार, सोने और चांदी का आयात देश के कुल आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है। पिछले वित्त वर्ष में सोने का आयात 30 अरब डॉलर से अधिक रहा, जिससे व्यापार घाटा बढ़ा और रुपए पर दबाव पड़ा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि “सोने जैसी गैर-जरूरी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाना जरूरी हो गया था ताकि विदेशी मुद्रा का अपव्यय रोका जा सके और रुपए की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।”

यह कदम पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में आई तेजी के बाद लिया गया है। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें 2,400 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे भारत में भी सोने की मांग बढ़ी है।

बाजार और उपभोक्ताओं पर असर

इस फैसले से सोने और चांदी की कीमतों में तुरंत उछाल देखा जा सकता है। दिल्ली, मुंबई और इंदौर जैसे प्रमुख ज्वेलरी बाजारों में 24 कैरेट सोने की कीमत 500-700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक बढ़ सकती है। ज्वेलर्स को उम्मीद है कि शादी-ब्याह के सीजन में मांग प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, सरकार का मानना है कि यह कदम लंबे समय में सकारात्मक साबित होगा। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सोने की खपत कम होगी, जिससे आयात बिल घटेगा और रुपए को मजबूती मिलेगी।

व्यापार घाटा और रुपए पर प्रभाव

विश्लेषकों के अनुसार, सोने और चांदी पर बढ़ी हुई ड्यूटी से चालू खाता घाटा 2-3 अरब डॉलर तक कम हो सकता है। रुपया भी 83.5-84 के स्तर से नीचे आ सकता है। RBI भी विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रुपए को संभाल रहा है, लेकिन यह नीतिगत कदम दीर्घकालिक राहत देगा।

ज्वेलर्स और उद्योग की प्रतिक्रिया

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन (GJF) ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे असंगठित क्षेत्र प्रभावित होगा और सोने की तस्करी बढ़ने की आशंका है। कुछ ज्वेलर्स ने सुझाव दिया है कि सरकार को केवल निवेश उद्देश्य से खरीदे जाने वाले सोने पर ड्यूटी बढ़ानी चाहिए, न कि आभूषणों पर।

आगे की राह

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम अस्थायी है और वैश्विक स्थिति सामान्य होने पर समीक्षा की जाएगी। साथ ही, सरकार डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम जैसे विकल्पों को बढ़ावा दे रही है ताकि भौतिक सोने की मांग कम हो।

यह फैसला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार अब विदेशी मुद्रा संरक्षण और आर्थिक स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हालांकि उपभोक्ताओं और ज्वेलर्स को तत्काल झटका लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह कदम रुपए को मजबूत करने और व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में सहायक साबित होगा।

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