FPI ने मई में ₹32,963 करोड़ निकाले: 2026 में कुल बिकवाली ₹2.25 लाख करोड़ पार
कमजोर रुपया, सुस्त अर्निंग और ग्लोबल अनिश्चितता से दबाव; घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को संभाला
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मई 2026 में भारतीय शेयर बाजार से ₹32,963 करोड़ की भारी बिकवाली की है। इससे 2026 में अब तक कुल FPI आउटफ्लो ₹2.25 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। यह लगातार तीसरा महीना है जब विदेशी निवेशक शुद्ध रूप से बिकवाली कर रहे हैं।
बिकवाली के मुख्य कारण
NSDL के आंकड़ों के अनुसार, मई में FPI की बिकवाली मुख्य रूप से तीन वजहों से हुई:
- कमजोर रुपया: रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों को नुकसान हुआ।
- सुस्त अर्निंग ग्रोथ: कई कंपनियों के Q4 और FY26 के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे।
- ग्लोबल अनिश्चितता: अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बाजार में जोखिम से बचाव (Risk Aversion) ने विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से दूर किया।
बाजार पर असर
इस लगातार बिकवाली से निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव बना रहा। मई में बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया और कुछ दिनों में भारी बिकवाली के कारण सूचकांक कमजोर रहे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने इस बिकवाली को संभाल लिया और बाजार को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। DII ने मई में भी मजबूत खरीदारी जारी रखी।
2026 में अब तक की स्थिति
2026 की शुरुआत से अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी से ₹2.25 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की है। यह आंकड़ा पिछले साल के कुल आउटफ्लो से भी ज्यादा है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर वैश्विक अनिश्चितता कम नहीं हुई और रुपया कमजोर बना रहा, तो बिकवाली का सिलसिला जारी रह सकता है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिकवाली मुख्य रूप से वैश्विक कारकों से प्रेरित है, न कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी कमजोरी से। भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बुनियाद पर खड़ी है। GDP ग्रोथ, कॉर्पोरेट आय और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार अभी भी सकारात्मक बने हुए हैं।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि जब वैश्विक स्थिति सामान्य होगी और अर्निंग ग्रोथ में सुधार आएगा, तब FPI फिर से भारतीय बाजार की ओर लौट सकते हैं। फिलहाल, घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा और मजबूत खुदरा भागीदारी बाजार को संभाले हुए है।
आगे क्या?
बाजार में सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, अर्निंग ग्रोथ और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखनी होगी। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि अगर अर्निंग सीजन में अच्छे नतीजे आए और रुपया स्थिर हुआ, तो FPI की बिकवाली धीमी हो सकती है।
विदेशी निवेशकों की इस लगातार बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार की दीर्घकालिक संभावनाएं अभी भी मजबूत मानी जा रही हैं।