SEZ सुधार: वाणिज्य मंत्रालय 30 जून को हितधारकों की बैठक बुलाएगा, नीति में बड़े बदलाव की तैयारी
स्पेशल इकोनॉमिक जोन को नई ऊर्जा देने की दिशा में अहम कदम, निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य
वाणिज्य मंत्रालय ने स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) नीति में बड़े सुधारों की तैयारी शुरू कर दी है। मंत्रालय 30 जून को सभी हितधारकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने जा रहा है, जिसमें SEZ नीति के overhaul पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
बैठक का उद्देश्य
इस बैठक में SEZ डेवलपर्स, निर्यातकों, उद्योग संगठनों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है:
- SEZ में लैंड यूज और इंफ्रास्ट्रक्चर नियमों में सरलीकरण
- टैक्स और इंसेंटिव स्ट्रक्चर में बदलाव
- निर्यात लक्ष्यों को पूरा करने के नए तरीके
- SEZ को डिजिटल और हाई-टेक यूनिट्स के अनुकूल बनाने की रणनीति
SEZ सुधार की जरूरत
वर्तमान SEZ नीति 2005 में शुरू हुई थी। पिछले 20 सालों में वैश्विक व्यापार परिदृश्य और घरेलू अर्थव्यवस्था काफी बदल चुकी है। इसलिए वाणिज्य मंत्रालय अब SEZ को नई ऊर्जा देने के लिए बड़े सुधार करने जा रहा है।
मंत्रालय का मानना है कि नई नीति से:
- विदेशी निवेश आकर्षित होगा
- निर्यात में बढ़ोतरी होगी
- नए रोजगार सृजन को गति मिलेगी
- SEZ को मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों सेक्टरों के लिए आकर्षक बनाया जा सकेगा
उद्योग जगत की उम्मीदें
FICCI, CII और ASSOCHAM जैसे उद्योग संगठनों ने इस बैठक का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि SEZ नीति में लचीलापन और आधुनिक सुविधाएं शामिल करने से भारत वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति बना सकेगा।
आगे क्या?
30 जून की बैठक के बाद वाणिज्य मंत्रालय नए SEZ फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट तैयार करेगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उम्मीद है कि नई नीति इस साल के अंत तक लागू हो जाएगी।
यह सुधार भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और निर्यात बढ़ाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा साबित होगा।