भारत के पास फूड प्रोसेसिंग निर्यात में $110 अरब का सुनहरा अवसर: NCAER रिपोर्ट
राष्ट्रीय अनुप्रयोग आर्थिक अनुसंधान परिषद के पेपर में बड़े निर्यात अवसर का जिक्र; मूल्य संवर्धन, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने का मौका
भारत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 110 अरब डॉलर यानी लगभग ₹9 लाख करोड़ से अधिक के निर्यात अवसर पर बैठा है। यह आकलन नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के एक ताजा पेपर में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर सही नीतिगत समर्थन, बुनियादी ढांचा और गुणवत्ता मानकों पर ध्यान दिया जाए तो भारत वैश्विक खाद्य बाजार में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ा सकता है।
NCAER का मुख्य निष्कर्ष
NCAER के अध्ययन में कहा गया है कि भारत की कृषि विविधता, बढ़ती प्रसंस्करण क्षमता और विश्व बाजार में मूल्य-संवर्धित खाद्य उत्पादों की मांग को देखते हुए फूड प्रोसेसिंग निर्यात में भारी संभावनाएं हैं। वर्तमान में भारत का खाद्य प्रसंस्करण निर्यात इस संभावित अवसर से काफी कम है। सही रणनीति अपनाकर देश इस बड़े बाजार का लाभ उठा सकता है।
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि सिर्फ प्राथमिक कृषि उत्पादों के निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय प्रसंस्कृत और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फोकस करने से ज्यादा विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अवसर?
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों को बेहतर कीमत दिलाने, फसल की बर्बादी कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने में मदद करता है। जब कच्चे कृषि उत्पादों को प्रोसेस करके निर्यात किया जाता है तो मूल्य श्रृंखला लंबी होती है और अर्थव्यवस्था को ज्यादा फायदा पहुंचता है।
$110 अरब का अवसर भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को समर्थन
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना
- निर्यात में विविधता लाना
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन
वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य उत्पादकों में शामिल है, लेकिन प्रसंस्करण का स्तर कई विकसित देशों की तुलना में कम है। फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान, अपर्याप्त कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स की कमी और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन न कर पाना प्रमुख चुनौतियां हैं।
NCAER पेपर में इन कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि बुनियादी ढांचे में निवेश, आधुनिक तकनीक अपनाने और निर्यातकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने की जरूरत है। पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
नीतिगत समर्थन की भूमिका
सरकार पहले से ही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, मेगा फूड पार्क, कोल्ड स्टोरेज विस्तार और कृषि निर्यात नीति के जरिए इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। NCAER के अनुसार, इन पहलों को और प्रभावी बनाने तथा राज्यों के साथ बेहतर समन्वय से निर्यात लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक उत्पादों, रेडी-टू-ईट फूड्स, प्रोसेस्ड फ्रूट्स, डेयरी और समुद्री उत्पादों जैसे सेगमेंट में भारत की अच्छी संभावनाएं हैं।
रोजगार और किसान हित
फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगने से खेत से बाजार तक की पूरी श्रृंखला मजबूत होती है। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी यह क्षेत्र आकर्षक है। महिलाओं और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। जब किसानों को उनकी उपज का स्थिर और बेहतर बाजार मिलता है तो वे गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं।
वैश्विक बाजार का परिदृश्य
विश्व में स्वास्थ्यवर्धक, सुविधाजनक और टिकाऊ खाद्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत अपनी विविध फसलों और मसालों के लिए जाना जाता है। अगर प्रसंस्कृत रूप में इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्वाद और मानकों के अनुसार तैयार किया जाए तो नए बाजार खुल सकते हैं।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मुक्त व्यापार समझौतों और निर्यात प्रोत्साहनों का बेहतर इस्तेमाल करके भारत अपनी पहुंच बढ़ा सकता है।
आगे की राह
$110 अरब के अवसर को वास्तविकता में बदलने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं। इसमें शामिल हैं:
- कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स का विस्तार
- गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं को मजबूत करना
- कौशल विकास और तकनीक अपनाना
- निर्यातकों के लिए आसान वित्त उपलब्ध कराना
- ब्रांड इंडिया को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना
सरकार, उद्योग और किसानों के बीच साझेदारी से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
निष्कर्ष
NCAER का पेपर भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की विशाल संभावनाओं को रेखांकित करता है। $110 अरब का निर्यात अवसर न सिर्फ विदेशी मुद्रा ला सकता है बल्कि किसानों की आय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है। सही नीति, निवेश और क्रियान्वयन के साथ भारत विश्व खाद्य बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है। अब जरूरत है कि इस अवसर को जमीनी हकीकत में बदला जाए।