दोनों दिन ओवरसब्सक्राइब हुआ इश्यू, ग्रीनशू विकल्प का पूरा इस्तेमाल; वित्त वर्ष में विनिवेश संग्रह लगभग ₹55,700 करोड़ के पार
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में हिस्सेदारी बिक्री की पेशकश (ओएफएस) के जरिए करीब ₹3,000 करोड़ जुटाए हैं। दो दिवसीय ओएफएस बुधवार को सफलतापूर्वक बंद हुआ और खुदरा निवेशकों सहित सभी वर्गों से अच्छी मांग देखने को मिली। सरकार ने पूरे ग्रीनशू विकल्प का इस्तेमाल करते हुए कुल 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची।
ओएफएस की मुख्य बातें
सरकार ने हिंदुस्तान कॉपर में 3 प्रतिशत आधार पेशकश के साथ अतिरिक्त 3 प्रतिशत ग्रीनशू विकल्प रखा था। फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर तय किया गया था, जो पिछले बंद भाव से करीब 9-10 प्रतिशत डिस्काउंट पर था। कुल मिलाकर 5.80 करोड़ से अधिक शेयर बिक्री के लिए रखे गए।
निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला ने कहा कि इश्यू दोनों दिन ओवरसब्सक्राइब रहा और सरकार ने पूरा ग्रीनशू विकल्प इस्तेमाल करने का फैसला किया। उन्होंने सभी निवेशकों का आभार व्यक्त किया और भरोसे के लिए धन्यवाद दिया।
गैर-खुदरा हिस्से में पहले दिन ही 3 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला। खुदरा निवेशकों के लिए 10 प्रतिशत शेयर आरक्षित थे और पात्र कर्मचारियों के लिए भी अलग कोटा रखा गया था। खुदरा हिस्से में भी जोरदार मांग रही।
सरकार की हिस्सेदारी
ओएफएस से पहले सरकार की हिंदुस्तान कॉपर में करीब 66.14 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के बाद यह घटकर लगभग 60 प्रतिशत रह गई है। सरकार अभी भी कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी बनाए हुए है।
विनिवेश लक्ष्य के करीब
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने विनिवेश से ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। हिंदुस्तान कॉपर ओएफएस से पहले आठ पीएसयू और एसयूयूटीआई प्रेषण के जरिए ₹52,716 करोड़ आ चुके थे। इस सफल बिक्री के बाद कुल संग्रह लगभग ₹55,700 करोड़ पहुंच गया है। यानी लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा पहले ही हासिल हो चुका है। बाकी रकम वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में जुटानी होगी।
इस साल एलआईसी, कोल इंडिया, एनएचपीसी, जीआईसी, सेंट्रल बैंक, आईआरएफसी, कोचीन शिपयार्ड और एनएलसी इंडिया सहित कई कंपनियों में अल्पांश हिस्सेदारी बेची जा चुकी है।
कंपनी का प्रदर्शन
हिंदुस्तान कॉपर देश की प्रमुख तांबा उत्पादक कंपनी है। हालिया तिमाही में कंपनी के मुनाफे और राजस्व में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। तांबे की मांग इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हुई है, इसलिए कंपनी को लेकर बाजार में सकारात्मक नजरिया रहा।
निवेशकों के लिए मायने
ओएफएस में खुदरा निवेशकों को डिस्काउंट पर शेयर खरीदने का मौका मिला। इश्यू बंद होने के बाद शेयरों में तेजी भी देखने को मिली, जिससे आवंटन पाने वाले निवेशकों को तुरंत लाभ हुआ। सरकारी कंपनियों के ओएफएस में रिटेल भागीदारी बढ़ना इस बात का संकेत है कि छोटे निवेशक भी पीएसयू शेयरों में दिलचस्पी ले रहे हैं।
आगे की राह
सरकार के पास अभी भी कई पीएसयू में पर्याप्त हिस्सेदारी है। लक्ष्य पूरा करने के लिए बाकी महीनों में और हिस्सेदारी बिक्री हो सकती है। हिंदुस्तान कॉपर ओएफएस की सफलता दिखाती है कि सही प्राइसिंग और मजबूत कंपनी पर बाजार का भरोसा कायम है।
निष्कर्ष
हिंदुस्तान कॉपर ओएफएस सरकार के विनिवेश कार्यक्रम की एक और सफल कड़ी साबित हुई है। करीब ₹3,000 करोड़ की उगाही, दोनों दिन ओवरसब्सक्रिप्शन और ग्रीनशू का पूरा उपयोग निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। इससे न सिर्फ राजकोष को मदद मिली है बल्कि पीएसयू शेयरों में रिटेल भागीदारी भी मजबूत हुई है। अब नजर बाकी विनिवेश सौदों और कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन पर रहेगी।