निर्मला सीतारमण ने औद्योगिक कॉरिडोर में तेज निवेश और उत्पादन शुरू करने पर जोर दिया

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NICDIT की बैठक में फोकस मंजूरी से आगे बढ़ाकर इंफ्रा पूरा करने, भूमि आवंटन और फैक्ट्रियां चालू करने पर; ₹2.21 लाख करोड़ निवेश की संभावना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) की प्रगति की समीक्षा करते हुए औद्योगिक गलियारों में तेज निवेश और उत्पादन शुरू करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ परियोजनाओं की मंजूरी पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने, भूमि आवंटन, निवेश आकर्षित करने और इकाइयों को उत्पादन में लाने की ओर बढ़ना होगा।

बैठक और मुख्य बातें

सीतारमण ने नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इंप्लीमेंटेशन ट्रस्ट (NICDIT) के एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

वित्त मंत्री ने कहा, “अब फोकस परियोजना मंजूरी से आगे बढ़कर इंफ्रास्ट्रक्चर के समय पर पूरा होने, भूमि आवंटन, निवेश और उत्पादन शुरू करने पर होना चाहिए।” उन्होंने राज्यों से भूमि, कनेक्टिविटी, यूटिलिटीज और वैधानिक मंजरियों से जुड़े अड़चनों को जल्द दूर करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक गलियारे विनिर्माण बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक इकोसिस्टम बनाने की रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। अगली पाइपलाइन के लिए औद्योगिक भूमि और इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार रखने पर भी जोर दिया गया।

NICDP की मौजूदा स्थिति

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम में 13 राज्यों में 20 परियोजनाएं और 7 औद्योगिक गलियारे शामिल हैं। अब तक:

  • 469 प्लॉट (लगभग 5,348 एकड़) आवंटित किए जा चुके हैं।
  • अनुमानित निवेश क्षमता ₹2.21 लाख करोड़
  • रोजगार क्षमता करीब 1.29 लाख लोगों की।
  • 134 इकाइयां पहले से उत्पादन में हैं।
  • 95 इकाइयां निर्माणाधीन हैं।

चार औद्योगिक स्मार्ट सिटीज—धोलेरा, शेंद्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी—उत्पादन चरण में प्रवेश कर चुकी हैं।

पीयूष गोयल का आह्वान

पीयूष गोयल ने परियोजनाओं के तेज और परिणाम-उन्मुख क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लैटेड फैक्ट्रीज, वर्कर हाउसिंग और सहायक सुविधाओं वाले निवेशक-तैयार इकोसिस्टम बनाने की बात कही। मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाने और देश-क्षेत्र विशिष्ट औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने पर भी ध्यान देने को कहा गया।

BHAVYA योजना

बैठक में भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) की भी समीक्षा हुई। इस योजना के तहत 100 निवेश-तैयार प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने का लक्ष्य है। पहले दौर में राज्यों से 87 आवेदन आए हैं।

किन भारतीय शेयरों को फायदा हो सकता है?

औद्योगिक गलियारों में तेज निवेश और उत्पादन से इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स और औद्योगिक कंपनियों को लाभ होने की संभावना है:

  • L&T: बड़े इंफ्रा और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स में अग्रणी भूमिका।
  • सीमेंस, एबीबी इंडिया: औद्योगिक ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिकल उपकरण।
  • आईआरबी इंफ्रा, पीएनसी इन्फ्रा, केएनआर कंस्ट्रक्शन: सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं से जुड़े।
  • अडानी एंटरप्राइजेज और संबंधित कंपनियां (धोलेरा जैसे प्रोजेक्ट्स में रुचि)।
  • औद्योगिक रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स कंपनियां।
  • कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के अन्य खिलाड़ी भी सकारात्मक धारणा से लाभान्वित हो सकते हैं।

आगे की दिशा

पीएम गतिशक्ति के साथ एकीकृत योजना, वर्कर हाउसिंग, स्वास्थ्य, स्किलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाओं को शामिल करने पर जोर दिया गया। इससे औद्योगिक क्षेत्रों को पूर्ण इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का औद्योगिक गलियारों में निवेश और उत्पादन तेज करने का आह्वान मेक इन इंडिया और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देने वाला है। ₹2.21 लाख करोड़ की निवेश क्षमता और लाखों रोजगार की संभावना को जमीन पर उतारने के लिए अब क्रियान्वयन की रफ्तार बढ़ानी होगी। सही समन्वय और अड़चनें दूर होने पर ये गलियारे भारत के औद्योगिक विकास के इंजन बन सकते हैं।

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