येस बैंक में एसएमबीसी की हिस्सेदारी 24.22% पर पहुंची: 4.22% अतिरिक्त शेयर खरीदे, अब सबसे बड़ा शेयरधारक

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कार्लाइल ग्रुप से डील के बाद जापानी बैंक का वर्चस्व, एसबीआई की हिस्सेदारी 10% से नीचे; क्रेडिट रेटिंग में सुधार से निवेशकों में उत्साह

मुंबई: जापान की प्रमुख बैंकिंग कंपनी सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (एसएमबीसी) ने येस बैंक में अपनी हिस्सेदारी को और मजबूत करते हुए 4.22% अतिरिक्त शेयर खरीद लिए हैं। इस अधिग्रहण के बाद एसएमबीसी की कुल हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 24.22% हो गई है, जिससे वह येस बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक बन गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), जो पहले प्रमुख शेयरधारक था, अब अपनी हिस्सेदारी 10% से थोड़ा अधिक रखता है। यह सौदा 22 सितंबर को ऑफ-मार्केट सेल के माध्यम से पूरा हुआ, जिसमें एसएमबीसी ने 132.39 करोड़ शेयर हासिल किए।

अधिग्रहण का विवरण और पृष्ठभूमि

एसएमबीसी ने ग्लोबल निवेश फर्म कार्लाइल ग्रुप की सहयोगी कंपनी सीए बस्क इन्वेस्टमेंट्स से यह अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदी है। कार्लाइल ने 2022 में येस बैंक में 10% तक की हिस्सेदारी हासिल की थी, लेकिन बाद में कुछ शेयर बाजार में बेच दिए थे। इस डील की कीमत लगभग 2,850 करोड़ रुपये आंकी गई है। इससे पहले, 18 सितंबर को एसएमबीसी ने एसबीआई और अन्य भारतीय बैंकों से 20% हिस्सेदारी 13,482 करोड़ रुपये में अधिग्रहित की थी, जिसमें एसबीआई ने अपनी 24% हिस्सेदारी का 13.18% हिस्सा बेचा था।

यह कदम 2020 की मार्च में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई येस बैंक की पुनरुद्धार योजना का हिस्सा है। उस समय, एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों ने 79% हिस्सेदारी लेकर बैंक को संकट से उबारा था। अब एसएमबीसी की बढ़ती हिस्सेदारी से बैंक की पूंजीगत मजबूती बढ़ेगी और वैश्विक पहुंच मजबूत होगी। आरबीआई ने एसएमबीसी को 24.99% तक हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी दे रखी है।

येस बैंक के बोर्ड में बदलाव

इस अधिग्रहण के साथ ही एसएमबीसी के दो नामित निदेशक—शिनिचिरो निशिनो और राजीव वीरावली कन्नन—येस बैंक के बोर्ड में गैर-कार्यकारी और गैर-स्वतंत्र निदेशक के रूप में शामिल हो गए हैं। यह बदलाव 18 सितंबर से प्रभावी है। येस बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ प्रशांत कुमार ने कहा, “एसएमबीसी का स्वागत करते हुए हम कह सकते हैं कि एसएमएफजी की वैश्विक क्षमता और एसबीआई की विश्वसनीयता के संयोजन से येस बैंक मजबूत होगा। यह जापान-भारत व्यापार प्रवाह को बढ़ावा देगा और सभी हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करेगा।”

वित्तीय प्रभाव और बाजार प्रतिक्रिया

इस खबर के बाद येस बैंक के शेयरों में तेजी देखी गई। 24 सितंबर को स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की कीमत में उछाल आया, क्योंकि निवेशक बैंक की बेहतर शासन व्यवस्था और पूंजी स्थिति पर भरोसा जता रहे हैं। इसके अलावा, चार प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों—सीआरआईएसआईएल, आईसीआरए, इंडिया रेटिंग्स और केयर—ने येस बैंक की रेटिंग को एए- स्तर पर अपग्रेड कर दिया है, जो मार्च 2020 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह अपग्रेड बैंक की मजबूत पूंजी, बेहतर शासन और व्यावसायिक प्रदर्शन को दर्शाता है।

एसएमबीसी की वैश्विक नेटवर्क से येस बैंक को कॉर्पोरेट बैंकिंग और क्रॉस-बॉर्डर समाधानों में लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत-जापान आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी। साथ ही, एसएमबीसी ने अपना निवेश पोर्टफोलियो समायोजित करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक में अपनी 1.65% हिस्सेदारी बेच दी है।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां

यह अधिग्रहण येस बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जो 2020 के संकट से उबरने के बाद स्थिरता की ओर अग्रसर है। बैंक अब एसएमबीसी के साथ मिलकर नए उत्पादों और बाजार विस्तार पर फोकस करेगा। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और प्रतिस्पर्धी बैंकिंग क्षेत्र में चुनौतियां बनी रहेंगी। फिर भी, यह सौदा निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने वाला है।

एसएमबीसी की बढ़ती हिस्सेदारी से येस बैंक न केवल मजबूत होगा, बल्कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश का एक सकारात्मक उदाहरण भी बनेगा। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और वैश्विक साझेदारी के संतुलन को दर्शाता है।

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